भोपाल में कश्मीर जैसा अनुभव: झीलों की नगरी में शुरू हुई ‘शिकारा’ राइड, मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ

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by: vijay nandan

भोपाल: प्रदेश की राजधानी अब पर्यटकों को कश्मीर जैसा आनंद देने के लिए तैयार है। भोपाल को आज एक नई सौगात मिली है। अपर लेक में शिकारा बोट सेवा की शुरुआत। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बोट क्लब पर इन खूबसूरत शिकारों को हरी झंडी दिखाकर शुरू किया।

जल पर्यटन को नई पहचान मिलेगी: CM मोहन यादव

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि “भोपाल का बड़ा तालाब अपनी खूबसूरती के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां शिकारा सेवा शुरू होने से पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। डल झील की तर्ज पर तैयार ये शिकारे पर्यटकों को बिल्कुल अलग और यादगार अनुभव देंगे। उन्होंने यह भी बताया कि राजधानी में लगातार बड़ी संख्या में लोग घूमने आते हैं और इस नई सुविधा से न सिर्फ पर्यटन बढ़ेगा बल्कि कई लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

CM ने शिकारे में लिया स्वादिष्ट नाश्ता

शुभारंभ के बाद मुख्यमंत्री ने शिकारा-बोट रेस्टोरेंट पर चाय, पोहा, समोसे और फलों का स्वाद लिया। इसके अलावा फ्लोटिंग बोट मार्केट से वस्त्रों की खरीददारी भी की।

क्यों खास है भोपाल का यह शिकारा प्रोजेक्ट?

पर्यटन निगम ने अपर लेक बोट क्लब में कुल 20 नए शिकारे शुरू किए हैं। शुभारंभ कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

नए शिकारे इन विशेषताओं से लैस है…

  1. बर्ड वॉचिंग की सुविधा
    हर शिकारे में दूरबीन उपलब्ध है, जिससे पर्यटक बड़े तालाब के आसपास के पक्षियों को नजदीक से देख सकेंगे।
  2. फूड और लोकल मार्केट का अनुभव
    राइड के दौरान स्थानीय व्यंजनों का स्वाद
    आर्गेनिक सब्जियाँ और फल
    मध्यप्रदेश के हस्तशिल्प उत्पाद
    पर्यटक शिकारा में बैठकर ही खरीद सकेंगे।
  3. पर्यावरण के अनुकूल निर्माण
    ये सभी शिकारे फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीयूरिथेन (FRP) से बने हैं, जो पूरी तरह प्रदूषण-रहित है।
    जल के संपर्क में कोई रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं
    झील की स्वच्छता और पारिस्थितिकी सुरक्षित
    मजबूत, टिकाऊ और आधुनिक तकनीक से निर्मित
    इन शिकारों का निर्माण एक प्रतिष्ठित संस्था द्वारा किया गया है, जिसके शिकारे केरल, बंगाल और असम में पहले से ही लोकप्रिय हैं।
  4. भोपाल को ‘वॉटर टूरिज्म हब’ बनाने की दिशा में बड़ा कदम
    पर्यटन विभाग का लक्ष्य है कि भोपाल को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जल-पर्यटन की प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित किया जाए। इतने बड़े पैमाने पर शिकारों का संचालन मध्यप्रदेश में पहली बार किया जा रहा है।

शिकारा राइड की फीस और समय

प्रति शिकारा क्षमता: 4–6 यात्री
किराया: ₹300 से ₹450 (आधे घंटे की सैर)
समय: सुबह 9 बजे से सूर्यास्‍त तक
एक शिकारे की लागत: लगभग ₹2.40 लाख
राइड के दौरान नाविक पर्यटकों को बड़े तालाब, उसकी विरासत और भोपाल के इतिहास से जुड़ी रोचक जानकारी भी देंगे।

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