भोपाल सेंट्रल जेल में बनेंगी 12 नई हाई सिक्योरिटी सेल, आतंकियों की बढ़ती संख्या से बिगड़ा संतुलन

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भोपाल सेंट्रल जेल में बनेंगी 12 नई हाई सिक्योरिटी सेल

🔥 मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • सेंट्रल जेल में मौजूद आतंकियों की संख्या क्षमता से ज्यादा
  • SIMI, PFI, HUT और ISIS जैसे संगठनों के आतंकी बंद हैं
  • 1.20 करोड़ की लागत से बनेंगी 12 नई हाई सिक्योरिटी सेल
  • हर आतंकी पर दो प्रहरी तैनात, सख्त निगरानी

📌 परिचय: भोपाल की जेल में क्यों बढ़ी चिंता?

भोपाल की सेंट्रल जेल, जो कि देश के सबसे सुरक्षित जेल परिसरों में से एक मानी जाती है, अब एक गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। यहां बंद खतरनाक आतंकियों की संख्या तय सीमा को पार कर चुकी है, जिससे जेल प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। मौजूदा सुरक्षा ढांचे पर दबाव को देखते हुए अब जेल परिसर में 12 नई हाई सिक्योरिटी सेल का निर्माण शुरू किया गया है। यह कदम सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।


🚨 69 आतंकियों के लिए 58 की कैपेसिटी – खतरे की घंटी!

भोपाल सेंट्रल जेल की वर्तमान हाई सिक्योरिटी व्यवस्था 58 आतंकियों को रखने के लिए बनाई गई थी। लेकिन फिलहाल यहां 69 आतंकी बंद हैं। यानी जेल अपनी सीमा से 11 अधिक खतरनाक कैदियों को संभाल रही है। ऐसे में सुरक्षा में कोई चूक जानलेवा साबित हो सकती है।

🔧 समाधान के लिए क्या किया जा रहा है?

  • 1.20 करोड़ रुपये के बजट से बनाई जा रही हैं 12 नई हाई सिक्योरिटी सेल
  • इन सेल्स में अत्याधुनिक निगरानी और नियंत्रण तकनीक होगी
  • आतंकी गतिविधियों पर 24×7 निगरानी सुनिश्चित की जाएगी

🧨 किन संगठनों के आतंकवादी हैं जेल में बंद?

भोपाल जेल में जो आतंकी बंद हैं, वे देश-दुनिया के कुख्यात आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं:

संगठन का नामबंद आतंकियों की संख्या
SIMI (स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया)23
PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया)21
HUT (हिज्ब उत तहरीर)17
JMB (जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश)4
ISIS (इस्लामिक स्टेट)4

इन संगठनों की विचारधारा, नेटवर्क और स्लीपर सेल संभावनाओं को देखते हुए इन बंदियों को सामान्य अपराधियों से अलग रखने की आवश्यकता महसूस की गई।


🔒 कैसे रखा जाता है आतंकियों को अलग?

भोपाल जेल प्रशासन की व्यवस्था बेहद सख्त है। हर एक आतंकी पर दो सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं।

आतंकियों के लिए विशेष नियम:

  • हर दिन 3.5 घंटे के लिए ही बाहर निकाले जाते हैं
  • सुबह 2.5 घंटे और शाम को 1 घंटे की खुली हवा की अनुमति
  • किसी से बातचीत की मनाही
  • सभी आतंकियों को जेल की यूनिफॉर्म और टोपी पहनना अनिवार्य
  • 65 आतंकियों को केवल कैंटीन और मुलाकात की सीमित सुविधाएं
  • सिर्फ 4 आतंकियों को ही परिवार से मिलने की अनुमति

🔎 प्रशासन पर सवाल – क्या सुरक्षा पुख्ता है?

यह सवाल बेहद अहम है कि जब जेल की कैपेसिटी पहले ही पार हो चुकी थी, तब भी क्यों इंतजार किया गया? क्या यह प्रशासन की लापरवाही है? क्या यह सुरक्षा के साथ समझौता नहीं है?

जेलों में कैदियों की भीड़ हमेशा एक चिंता का विषय रही है, लेकिन जब बात आतंकियों की हो, तो खतरा कई गुना बढ़ जाता है।


🏗️ नई हाई सिक्योरिटी सेल्स – क्या होगा खास?

हालांकि विस्तार की योजना अब शुरू हो गई है, लेकिन सवाल ये भी है कि क्या ये सेल्स भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं?

संभावित विशेषताएं:

  • 24×7 सीसीटीवी निगरानी
  • अत्याधुनिक सेल लॉकिंग सिस्टम
  • अलग-अलग ब्लॉकों में आतंकियों को रखना
  • हर सेल में स्मार्ट अलार्म सिस्टम
  • AI आधारित सुरक्षा सॉफ़्टवेयर (संभावित प्रयोग)

📰 भोपाल क्यों बन रहा है आतंकियों का केंद्र?

भोपाल सेंट्रल जेल देश की उन गिनी-चुनी जेलों में से एक है जहां हाई-प्रोफाइल आतंकवादियों को रखा जाता है। इसकी भौगोलिक स्थिति, राजनीतिक स्थिरता और निगरानी संसाधनों के कारण इसे प्राथमिकता दी जाती है।

हालांकि, यह भी सवाल खड़ा करता है कि क्या मध्य प्रदेश की राजधानी को इस तरह के खतरों के केंद्र में रखना सुरक्षित है?


निष्कर्ष: उठाया गया कदम सही, लेकिन देर से

भोपाल सेंट्रल जेल में आतंकियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 12 नई हाई सिक्योरिटी सेल बनाना एक जरूरी कदम है। लेकिन यह फैसला काफी पहले लिया जाना चाहिए था, जब संख्या ने पहली बार सीमा लांघी थी। अब जबकि 69 आतंकी पहले से ही बंद हैं, किसी भी सुरक्षा चूक की कीमत बहुत बड़ी हो सकती है।

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