जबलपुर हाईकोर्ट ने भोपाल जिले के कलेक्टर को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का आदेश जारी किया है। यह निर्णय एक अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान लिया गया। न्यायालय ने पहले कलेक्टर से संबंधित मामले में नीलामी प्रक्रिया की जानकारी मांगी थी, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली थी।
मामले की पृष्ठभूमि
भोपाल निवासी अधिवक्ता अरविंद वर्मा ने हाईकोर्ट में एक याचिका प्रस्तुत की थी। उन्होंने बताया कि एक बिल्डर ने उन्हें 20 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया था। इस संबंध में रियल एस्टेट विनियमन प्राधिकरण (RERA) ने बिल्डर के विरुद्ध आदेश पारित किया था। इस आदेश के अनुसार, बिल्डर को मूल राशि के साथ 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करना था।
हाईकोर्ट ने भोपाल कलेक्टर को निर्देश दिया था कि वे 60 दिनों के भीतर यह राशि वसूल कर याचिकाकर्ता को दिलवाएं। हालांकि, निर्धारित समय सीमा के बीत जाने के बाद भी इस आदेश का पालन नहीं हुआ। इसके परिणामस्वरूप याचिकाकर्ता ने न्यायालय के आदेश की अवहेलना के लिए अवमानना याचिका दायर की।

न्यायालय ने दिया था अंतिम अवसर
हाईकोर्ट ने इस मामले में कलेक्टर को 30 दिनों का अतिरिक्त समय प्रदान किया था। साथ ही यह चेतावनी भी दी थी कि यदि दूबारा अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी, तो जिला कलेक्टर पर जुर्माना लगाया जाएगा। किंतु इस चेतावनी के बावजूद कलेक्टर ने आदेश का पालन करने में कोई प्रगति नहीं दिखाई।
पिछली सुनवाई के दौरान कलेक्टर की ओर से बताया गया था कि बिल्डर की संपत्ति को जब्त करने की प्रक्रिया चल रही है। इस संपत्ति की नीलामी के बाद प्राप्त राशि से याचिकाकर्ता को भुगतान किया जाएगा। न्यायालय ने इस नीलामी प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति से संबंधित जानकारी मांगी थी, लेकिन कलेक्टर ने कोई प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया।
अगली सुनवाई 28 अप्रैल को
इस मामले में अगली सुनवाई 28 अप्रैल, 2025 को निर्धारित की गई है। न्यायमूर्ति एके सिंह की एकल पीठ ने भोपाल कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता ध्रुव वर्मा और कपिल दुग्गल ने किया।
निष्कर्ष
यह मामला प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा न्यायालयीन आदेशों के प्रति उदासीनता को उजागर करता है। न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भोपाल कलेक्टर अगली सुनवाई में न्यायालय को क्या स्पष्टीकरण प्रस्तुत करते हैं।





