by:vijay nandan
भोपाल: होशंगाबाद रोड स्थित समरधा क्षेत्र में ‘भोज-नर्मदा द्वार’ का निर्माण किया जाएगा। रविवार सुबह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस द्वार की आधारशिला रखी और विधिवत भूमिपूजन किया। इसी अवसर पर उन्होंने नगर निगम भोपाल द्वारा नीमच में स्थापित 10 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र का लोकार्पण भी किया। यह संयंत्र सौर ऊर्जा परियोजना के प्रथम चरण का हिस्सा है।
इस अवसर पर कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, सांसद आलोक शर्मा, विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवानदास सबनानी, भोपाल की महापौर मालती राय, नगर निगम अध्यक्ष कैलाश सूर्यवंशी और बीजेपी जिलाध्यक्ष रविंद्र यति शामिल थे।

भोपाल में बनेंगे ऐतिहासिक द्वार
नगर निगम भोपाल दो प्रमुख स्थानों पर ऐतिहासिक स्वरूप वाले भव्य द्वार निर्माण की योजना पर कार्य कर रहा है। इनमें से एक द्वार होशंगाबाद रोड पर ‘भोज-नर्मदा द्वार’ के नाम से बनेगा, जिसके लिए भूमिपूजन हो चुका है। दूसरा द्वार इंदौर-भोपाल रोड पर प्रस्तावित है, जिसे ‘विक्रमादित्य द्वार’ नाम दिया जाएगा। इस द्वार के लिए भी जल्द ही कार्यवाही शुरू की जाएगी।
इसके अतिरिक्त निगम अन्य प्रमुख मार्गों जैसे बैरसिया रोड, रायसेन रोड, कोलार रोड, विदिशा रोड और मुबारकपुर आदि पर भी इस तरह के भव्य प्रवेश द्वार बनाने की योजना बना रहा है। इसका उद्देश्य राजधानी भोपाल को ऐतिहासिक पहचान और सौंदर्य की दृष्टि से समृद्ध बनाना है।
नीमच में सौर ऊर्जा संयंत्र का शुभारंभ
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगर निगम की सौर ऊर्जा परियोजना के तहत नीमच जिले में स्थापित 10 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र का लोकार्पण भी किया। इस दौरान मंत्रिमंडल के सदस्य, सांसद, विधायक, महापौर, निगम अध्यक्ष, एमआईसी सदस्य और पार्षदगण भी उपस्थित रहे।
“वीर शासकों की विरासत ही हमारी पहचान” – मुख्यमंत्री
भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की पहचान इसके महान शासकों से जुड़ी रही है। सम्राट विक्रमादित्य को आज भी उनकी न्यायप्रियता, पराक्रम और जनकल्याण के लिए याद किया जाता है, वहीं राजा भोज शिक्षा, युद्ध कौशल और प्रशासन के प्रतीक माने जाते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य है कि राज्य की गौरवशाली परंपराओं को आधुनिक भारत और वैश्विक मंच पर पुनः स्थापित किया जाए। इसी उद्देश्य से भोपाल के प्रमुख मार्गों पर ऐसे द्वार बनाए जा रहे हैं जो न केवल ऐतिहासिक प्रतीक होंगे, बल्कि राजधानी को एक नया और विशिष्ट स्वरूप भी देंगे।





