बांग्लादेश करेंसी में बदलाव: शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर हटी, अब दिखेंगे हिंदू-बौद्ध मंदिर

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बांग्लादेश सरकार ने करेंसी नोटों में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए देश के संस्थापक ‘शेख मुजीबुर रहमान’ की तस्वीर हटाने का फैसला किया है। नई करेंसी में अब हिंदू और बौद्ध मंदिरों, राष्ट्रीय शहीद स्मारक, और लोकप्रिय कलाकृतियों की तस्वीरें दिखाई देंगी। यह बदलाव देश की सांस्कृतिक विविधता और विरासत को सम्मान देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


नए करेंसी नोटों में क्या बदलाव हुए हैं?

1 जून 2025 से जारी किए गए नए नोटों में पहली बार किसी भी मानव आकृति को नहीं दर्शाया गया है। इन नए नोटों की प्रमुख विशेषताएं:

  • 1,000 टका, 50 टका और 20 टका मूल्य वर्ग के नोट जारी किए गए हैं।
  • नोटों पर हिंदू और बौद्ध मंदिर, राष्ट्रीय शहीद स्मारक, और प्रसिद्ध चित्रकार जैनुल आबेदीन की कृतियों को स्थान दिया गया है।
  • पुराने नोट जिन पर शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर है, वे अब भी वैध और प्रचलन में रहेंगे।

बदलाव का उद्देश्य क्या है?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय किसी एक व्यक्ति को दर्शाने के बजाय बांग्लादेश की समावेशी सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने के लिए लिया गया है। इस बदलाव के पीछे प्रमुख उद्देश्य हैं:

  • राजनीतिक तटस्थता को बढ़ावा देना
  • धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान
  • राष्ट्रीय एकता और विरासत का चित्रण

करेंसी पर दिखेंगे ये स्थल

नए नोटों में निम्नलिखित प्रमुख छवियां शामिल हैं:

  • हिंदू मंदिरों की स्थापत्य कला
  • बौद्ध विहार और मूर्तिकला
  • 1971 के मुक्ति संग्राम को समर्पित राष्ट्रीय शहीद स्मारक
  • प्रसिद्ध चित्रकार जैनुल आबेदीन की कलाकृति

कौन थे शेख मुजीबुर रहमान?

  • शेख मुजीबुर रहमान को ‘बंगबंधु’ (बंगाल का मित्र) के नाम से जाना जाता है।
  • वे बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के पिता थे।
  • उन्हें 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता में उनकी भूमिका के लिए राष्ट्रपिता का दर्जा प्राप्त है।

हालांकि, हाल के समय में उनकी छवि को लेकर देश में विवाद और विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं, जिनमें उनकी भित्तिचित्रों को नुकसान पहुंचाया गया और अवामी लीग के नेताओं के घरों पर हमले किए गए।

1975 में हुई थी मुजीबुर रहमान की हत्या

  • 15 अगस्त 1975 को एक सैन्य तख्तापलट में शेख मुजीबुर रहमान की हत्या कर दी गई थी
  • इस हमले में उनके परिवार के अधिकांश सदस्य भी मारे गए थे।
  • उस समय शेख हसीना जर्मनी में थीं, जिससे उनकी जान बच गई।

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