रिपोर्ट- राजेश साहू, एडिट- विजय नंदन
बालोद: जिले की जुंगेरा पंचायत में स्वच्छता का जिम्मा संभाल रही स्वच्छाग्राही महिलाओं को पिछले सात महीनों से उनका मानदेय (वेतन) नहीं मिला है। मानदेय रोके जाने के कारण इन महिलाओं को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। थक-हारकर अब इन महिलाओं ने जिला प्रशासन से गुहार लगाते हुए जल्द से जल्द बकाया मानदेय देने की मांग की है।
दीवाली पर भी छाई रही आर्थिक तंगी
स्वच्छाग्राही महिलाओं का कहना है कि वे अपने घर के काम छोड़कर हर सुबह कचरा कलेक्शन का काम करती हैं, ताकि उनका गांव स्वच्छ और स्वस्थ बना रहे। महिला समूह अध्यक्ष ममता भूआर्य (गहरा हरा साड़ी) ने बताया कि काम के प्रति सक्रिय रहने के बावजूद, उन्हें सात महीनों से भुगतान नहीं मिला है।

स्वच्छाग्राही महिला नर्मदिया भुआर्य (हल्का गुलाबी काला बॉर्डर साड़ी) ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि हाल ही में जब पूरा देश दीवाली मना रहा था, तब उनके सामने आर्थिक संकट इतना गहरा था कि उन्हें अपने घरों में दीप जलाने और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए भी जूझना पड़ा।
एक अन्य स्वच्छाग्राही महिला सुशीला कोठारी (नीला साड़ी) ने भी मानदेय न मिलने से हो रही परेशानी को दोहराया और कहा कि परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, दी हड़ताल की चेतावनी
आर्थिक संकट से जूझ रही इन महिलाओं ने अब बालोद कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में उन्होंने तत्काल अपना बकाया मानदेय जारी करने की मांग की है। महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो वे मजबूरन गांव में कचरा कलेक्शन का कार्य बंद कर देंगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कार्य बंद होने के बाद गांव में फैलने वाली गंदगी और अन्य समस्याओं के लिए सीधे तौर पर प्रशासन जिम्मेदार होगा।





