जब नाम से पहले डर आता था – बब्लू श्रीवास्तव

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babloo srivastava

“जब नाम से पहले डर आ जाए, तो समझो ये कहानी किसी आम इंसान की नहीं…”

गोरखपुर की सड़कों पर एक वक्त था जब सिर्फ एक नाम की फुसफुसाहट लोगों को खामोश कर देती थी —
बब्लू श्रीवास्तव।
न वो हीरो था, न विलेन — वो एक सोच था, जो कानून की पकड़ से आगे चलती थी।

वो दिमाग था, जिसने उत्तर भारत के क्राइम मैप को Systematically Hack किया।
वो हाथ नहीं उठाता था, वो इशारा करता था।
वो चीखता नहीं था, उसकी खामोशी भी धमाका थी।


बब्लू श्रीवास्तव कौन था?

  • पूरा नाम: बृजेश कुमार श्रीवास्तव
  • जन्म: 1962, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
  • परिवार: व्यवसायिक मध्यवर्गीय पृष्ठभूमि
  • शिक्षा: गोरखपुर में शुरुआती पढ़ाई, फिर लखनऊ यूनिवर्सिटी

बचपन से ही तेज दिमाग और शांत स्वभाव वाला बब्लू जब यूनिवर्सिटी पहुंचा, तो राजनीति और अपराध की सीमाएं धुंधली हो गईं।
छात्र राजनीति ने उसे सीखा दिया कि सत्ता पाने के लिए डर और चालाकी दोनों जरूरी हैं।


अपराध की शुरुआत और नेटवर्क का विस्तार

कॉलेज के दिनों में ही बब्लू का नाम वसूली, जमीन कब्जा और ठेकेदारी जैसे मामलों में आने लगा।
धीरे-धीरे उसका नेटवर्क लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और बिहार तक फैल गया।

“बब्लू वो नाम बन गया था जो थानों की फाइलों में नहीं, नेताओं की डायरी में लिखा जाता था।”

उसका तरीका साफ था – हिंसा से नहीं, दिमाग से डर पैदा करना।
वो कभी सामने नहीं आता था, लेकिन हर वार के पीछे उसका नाम होता था।


दाऊद इब्राहिम से जुड़ाव और अंडरवर्ल्ड में एंट्री

1990 के दशक में जब मुंबई अंडरवर्ल्ड का दौर चरम पर था, तब दाऊद इब्राहिम को ऐसे लोगों की जरूरत थी जो भारत में उसके हवाला और मनी लॉन्डरिंग के नेटवर्क को संभाल सकें।

बब्लू इस काम के लिए बिल्कुल फिट था।

  • उसने हवाला का जाल बिछाया
  • बोगस कंपनियों से करोड़ों का पैसा इधर-उधर किया
  • बैंक फ्रॉड, फर्जी पासपोर्ट और नकली कागज़ात उसके पास सामान्य चीजें थीं

“दाऊद की बंदूक और बब्लू का दिमाग — अंडरवर्ल्ड का सबसे खतरनाक गठजोड़ बन गया।”


पुलिस की आंखों में धूल, फिर भी हर जगह मौजूद

जब 1993 के मुंबई ब्लास्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने नेटवर्क को तोड़ना शुरू किया, तब बब्लू का नाम भी सामने आया।
भारत ने इंटरपोल से Red Corner Notice जारी करवाया।

वो नेपाल, सिंगापुर और बांग्लादेश में छिपता रहा।
1995 में सिंगापुर में उसकी गिरफ्तारी हुई, जो एक बड़ा ऑपरेशन था।
उसके बाद भारत सरकार ने उसे प्रत्यर्पित किया — ये अपने समय का सबसे चर्चित प्रत्यर्पण केस था।


बब्लू और पॉलिटिक्स: सिस्टम के अंदर की सत्ता

बब्लू की ताकत सिर्फ गली के लड़कों तक सीमित नहीं थी,
उसका नेटवर्क नेताओं और अधिकारियों तक फैला हुआ था।

  • वो बड़े नेताओं के लिए काम करता
  • चुनावों में फंडिंग करता
  • और केसों को उलझाकर रखता

“बब्लू के खिलाफ केस दर्ज होता था, लेकिन उसके वकील और कनेक्शन उसे जेल से ज़्यादा अदालत के बाहर की ताकत बना देते थे।”


पूर्वांचल के तीन चेहरे: बब्लू, मुख्तार और बृजेश सिंह

उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल इलाका हमेशा से माफिया राजनीति का गढ़ रहा है।

  • मुख्तार अंसारी – राजनीतिक ताकत के साथ अपराध का कॉकटेल
  • बृजेश सिंह – सीधे टकराव और दबंगई की मिसाल
  • बब्लू श्रीवास्तव – दोनों से अलग, एक रणनीतिकार, जो छाया में रहकर राज करता

“जब दो शेर लड़ते हैं, जंगल पर राज उस लोमड़ी का होता है जो चुपचाप शिकार ले जाती है – वो लोमड़ी बब्लू था।”


जेल में भी बादशाहत

बब्लू की गिरफ्तारी के बाद जब उसे जेल भेजा गया, तब भी उसने हार नहीं मानी।
बल्कि जेल को ही उसने अपने ऑपरेशन का नया हेडक्वार्टर बना लिया।

  • जेल में बैठकर उसने वसूली, ठेके और केस मैनेज किए
  • मोबाइल, सिम, नेटवर्क – सब उसके कंट्रोल में
  • जेल स्टाफ तक उसकी पहुंच थी

“सलाखों के पीछे उसका शरीर था, लेकिन उसका दिमाग पूरे सिस्टम में घूम रहा था।”


क्या उसने सच में अपराध छोड़ा?

हाल के वर्षों में बब्लू ने दावा किया कि उसने अपराध छोड़ दिया है और अब वो धार्मिक ग्रंथ पढ़ता है, आत्मचिंतन करता है।

कई लोग मानते हैं कि ये उसका छलावा है — एक नई चाल।

“एक असली गैंगस्टर तब तक गैंगस्टर रहता है, जब तक उसका नाम लोगों के मन में डर बनकर ज़िंदा है।”


निष्कर्ष: बब्लू – एक नाम, एक कहानी, एक चेतावनी

बब्लू श्रीवास्तव कोई एक डॉन नहीं था,
वो उस व्यवस्था का आइना था जिसमें सत्ता, अपराध और सिस्टम एक-दूसरे से हाथ मिलाते हैं।

“वो नायक नहीं था, लेकिन उसकी कहानी आज भी हर अंधेरे गली में गूंजती है।”

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