By: vijay nandan
नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र में SIR पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संबोधन ने लोकसभा में तीखा हंगामा खड़ा कर दिया। शाह ने अपने भाषण में ‘वोट चोरी’ के तीन ऐतिहासिक उदाहरण गिनाते हुए कहा कि विपक्ष बार-बार इस मुद्दे को उठा रहा है, जबकि देश के राजनीतिक इतिहास में कई बार ऐसे प्रसंग सामने आ चुके हैं।
गृहमंत्री शाह ने समझाया वोट चोरी क्या है?
- अमित शाह ने कहा कि ‘वोट चोरी’ तीन परिस्थितियों में मानी जाती है
- जब किसी के पास पात्रता न हो लेकिन वह मतदाता बन जाए,
जब चुनाव अनुचित तरीकों से जीता जाए,
जब वास्तविक जनादेश के विपरीत कोई पद हासिल कर लिया जाए।
उनका कहना था कि इन तीनों श्रेणियों के उदाहरण देश के इतिहास में स्पष्ट रूप से दर्ज हैं।
#WATCH | Speaking on electoral reforms, in Lok Sabha, Union HM Amit Shah says, "…For two days, we told the Opposition that this should be discussed later, after two Sessions. But they didn't relent. We agreed…Why did we say 'No'? There were two reasons for the 'No'. One, they… pic.twitter.com/pPBsnMg7BS
— ANI (@ANI) December 10, 2025
पहली ‘वोट चोरी’ का उदाहरण: नेहरू बनाम पटेल
शाह ने दावा किया कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री के चयन के समय कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्षों ने 28 वोट सरदार वल्लभभाई पटेल को और 2 वोट जवाहरलाल नेहरू को दिए थे, इसके बावजूद नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया गया। उनके इस बयान पर कांग्रेस सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया और सदन में शोरगुल बढ़ गया।
दूसरा उदाहरण: इंदिरा गांधी का चुनाव
गृह मंत्री ने कहा कि अनैतिक तरीके से चुनाव जीतना भी वोट चोरी की श्रेणी में आता है। उन्होंने 1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इंदिरा गांधी के निर्वाचन को अवैध घोषित किए जाने का जिक्र किया। शाह ने कहा कि इसके बाद तत्कालीन सरकार ने ऐसा कानून लाया, जिसके तहत प्रधानमंत्री के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता था और इसे उन्होंने “वोट चोरी का संरक्षण” बताया।
तीसरा उदाहरण: मतदाता बनने की पात्रता
अपने तीसरे उदाहरण में शाह ने कहा कि एक मामले में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी देश की नागरिकता प्राप्त करने से पहले ही मतदाता बन गई थीं। उन्होंने कहा कि यह मामला फिलहाल दिल्ली की एक दीवानी अदालत में विचाराधीन है और तथ्य अदालत के समक्ष रखे गए हैं।
कांग्रेस ने दी चुनौती
अमित शाह के इन बयानों पर विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी और आरोपों को राजनीतिक बदले की भावना बताया। कांग्रेस ने चुनौती दी है कि सरकार इन दावों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करे। सदन में बढ़ते शोर और नारेबाज़ी के बीच अध्यक्ष को कई बार व्यवस्था बहाल करनी पड़ी।





