Reporter: Dinesh Gupta, Edit By: Mohit Jain
Ambikapur: सरगुजा जिले में आदिवासी समाज की एक सुंदर और परंपरागत संस्कृति देखने को मिल रही है। दिसंबर माह आते ही यहां के गांवों में बच्चों की टोलियां खास अंदाज में नजर आती हैं, जो सुगा नृत्य के माध्यम से अपनी परंपरा को जीवंत बनाए रखती हैं।
घर-घर जाकर करते हैं सुगा नृत्य
परंपरा के अनुसार आदिवासी बच्चे दिसंबर महीने में गांव के हर मुहल्ले और घर-घर जाकर सुगा नृत्य करते हैं। इस दौरान वे गीत और नृत्य के साथ लोगों से स्वेच्छा से धान, चावल, गेहूं जैसे अनाज एकत्र करते हैं। ग्रामीण भी खुशी-खुशी बच्चों को अनाज देकर इस परंपरा में सहभागिता निभाते हैं।

नए साल पर मनाते हैं सामूहिक उत्सव
बच्चों द्वारा दिसंबर भर में जुटाया गया अनाज एक खास उद्देश्य के लिए होता है। एक जनवरी को सभी बच्चे मिलकर पिकनिक मनाते हैं और उसी अनाज से तैयार भोजन के साथ नए साल का उत्सव सामूहिक रूप से मनाते हैं। यह परंपरा बच्चों में एकता, सहयोग और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करती है।
लुंड्रा क्षेत्र से सामने आई खूबसूरत तस्वीर
यह मनमोहक दृश्य सरगुजा जिले के लुंड्रा क्षेत्र से सामने आया है, जहां छोटे-छोटे बच्चे सुगा नृत्य करते हुए अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोते नजर आ रहे हैं। यह परंपरा न केवल आदिवासी समाज की पहचान है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी है।





