एक ही वार्ड के 252 लोगों को आवंटित किए गए मकान
अम्बिकापुर: केन्द्र सरकार द्वारा गरीब आवासहीनों को पक्का घर देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अम्बिकापुर निगम क्षेत्र में मोर मकान, मोर चिन्हारी योजना के तहत घर बनवाए जा रहे थे, लेकिन इस योजना के आवंटन में भारी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। यह भ्रष्टाचार इतना चौंकाने वाला है कि अब तक किसी ने इस पर विश्वास करना मुश्किल माना है।
भ्रष्टाचार का खुलासा
अम्बिकापुर नगर निगम क्षेत्र के सुभाषनगर में मोर मकान, मोर चिन्हारी योजना के तहत कुल 493 मकानों का आवंटन होना था। इनमें से 465 मकान अब तक पूर्ण हो चुके थे और इनका आवंटन 4 अप्रैल को लॉटरी के माध्यम से होने वाला था। जब आवेदन मंगाए गए थे, तब निगम की पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में करीब 5000 लोगों ने आवेदन दिया था, लेकिन मकान का निर्माण कार्य तब तक शुरू नहीं हुआ था। आवेदनकर्ताओं से राशि भी ली गई थी, जिससे बाद में बवाल हुआ और राशि वापस करने की बात हुई।
फिर, बिना किसी शुल्क के आवेदन मंगाए गए थे और करीब 9000 आवेदन प्राप्त हुए थे। इन आवेदनों की जांच के बाद अधिकारियों ने मात्र 1924 लोगों को पात्र माना था, जिनमें से ही लॉटरी के माध्यम से मकान का आवंटन किया जाना था।
भ्रष्टाचार की नयी गाथा
लेकिन अधिकारियों ने लॉटरी प्रक्रिया से पहले ही एक सूची तैयार कर दी थी और इस सूची में हैरान करने वाला खुलासा हुआ। अधिकारियों ने 465 में से 251 मकान सुभाषनगर के गंगापुर वार्ड (वार्ड क्रमांक 47) के आवेदकों को आवंटित कर दिए। इसके बाद बची हुई 214 मकानों को शेष 47 वार्डों के आवेदकों में बांट दिया गया। इस प्रकार, एक ही वार्ड के 252 लोगों को मकान आवंटित कर दिए गए।
सत्ता पक्ष के पार्षदों ने किया विरोध
इस भ्रष्टाचार को लेकर अब बवाल मच चुका है। सत्ता पक्ष के पार्षदों ने इस पूरे मामले की जांच की मांग की है। वे जानना चाहते हैं कि कैसे एक ही वार्ड के इतने लोगों को पात्र बना दिया गया और इस प्रक्रिया में पारदर्शिता क्यों नहीं बरती गई।
इस भ्रष्टाचार की जांच के बाद ही मकान आवंटन की प्रक्रिया को रोक दिया गया है, और अब अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस पूरे मामले ने नगर निगम के कामकाजी माहौल और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।





