BY: Yoganand shrivastva
12 जून को एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 ने अहमदाबाद से उड़ान भरी थी, लेकिन महज दो मिनट के अंदर ही यह हादसे का शिकार हो गई। टेकऑफ के समय विमान 200 फीट की ऊंचाई पर था। अब, इस दुर्घटना से जुड़े कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर की जांच से चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं।
🎙️ कॉकपिट में आखिरी बातचीत: को-पायलट की घबराई आवाज़
अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (WSJ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, कैप्टन सुमीत सभरवाल ने उड़ान के दौरान जानबूझकर विमान के इंजनों में ईंधन की आपूर्ति को रोक दिया था। यह खुलासा दोनों पायलटों के बीच हुई बातचीत के रिकॉर्ड से हुआ है।
को-पायलट क्लाइव कुंदर, जिन्होंने 3400 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव हासिल किया है, उन्होंने जब देखा कि फ्यूल सप्लाई बंद हो गई है तो उन्होंने आश्चर्य जताते हुए पूछा—
“आपने फ्यूल स्विच CUTOFF पोजीशन में क्यों कर दिया?”
रिकॉर्डिंग के मुताबिक, को-पायलट की आवाज में घबराहट साफ झलक रही थी, जबकि कैप्टन सभरवाल, जिनके पास 15,000 से अधिक घंटे की फ्लाइंग एक्सपीरियंस था, पूरी तरह शांत बने रहे।
शुरुआती जांच रिपोर्ट क्या कहती है?
भारत की एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इनवेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने 12 जुलाई को एक प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें बताया गया था कि दोनों इंजनों में अचानक ईंधन की आपूर्ति रुकने के कारण विमान क्रैश हुआ।
हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि फ्यूल स्विच खुद बंद हुआ या किसी ने जानबूझकर ऐसा किया। रिकॉर्डर से सिर्फ इतना पता चला कि एक पायलट ने दूसरे से सवाल किया, “तुमने फ्यूल क्यों बंद किया?”, और जवाब में कहा गया, “मैंने कुछ नहीं किया।”
एअर इंडिया का दावा: फ्यूल कंट्रोल स्विच में कोई खराबी नहीं
इस घटना के बाद, एअर इंडिया ने अपने सभी बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच की व्यापक जांच करवाई। कंपनी के अनुसार,
- किसी भी विमान में फ्यूल स्विच में कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं पाई गई।
- इसके साथ ही थ्रॉटल कंट्रोल मॉड्यूल (TCM) को भी बदला गया, जो फ्यूल स्विच का अभिन्न हिस्सा होता है।
DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) ने सभी एयरलाइंस को निर्देश दिया है कि 21 जुलाई तक बोइंग 737 और 787 सीरीज के सभी विमानों की जांच पूरी की जाए।
पायलट यूनियन का विरोध: कहा- छवि खराब करने की कोशिश
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। संगठन के मुताबिक—
- बिना पूरी जांच के पायलटों पर दोषारोपण करना अनुचित और असमय है।
- रिपोर्ट में केवल कॉकपिट बातचीत के चुनिंदा हिस्से पेश किए गए, जिससे भ्रम की स्थिति बन रही है।
- FIP ने मीडिया और अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे बिना पुष्टि के बयान या आकलन न करें।
FIP के अध्यक्ष सीएस रंधावा ने कहा कि पायलट यूनियनों को जांच प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया और यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है।
क्रैश साइट से मिले तकनीकी उपकरण
क्रैश स्थल से विमान का फ्यूल कंट्रोल स्विच बरामद हुआ, जो कॉकपिट में थ्रस्ट लीवर के पास स्थित होता है। इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि टेक्निकल फैक्टर्स की भूमिका इस दुर्घटना में क्या रही।
हादसे के 8 दिन बाद पार्टी, 4 कर्मचारियों से इस्तीफा मांगा
एअर इंडिया ने अपनी ग्राउंड हैंडलिंग इकाई AISATS के चार कर्मचारियों से इस्तीफा मांगा है।
- इन कर्मचारियों का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे प्लेन हादसे के 8 दिन बाद पार्टी मनाते दिखे।
- कंपनी ने इसे अनुचित आचरण मानते हुए यह कदम उठाया है।
अब भी कई अनसुलझे सवाल
हालांकि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आ चुकी है, लेकिन अभी भी कई महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर नहीं मिले हैं:
- फ्यूल स्विच अपने-आप बंद हुआ या किसी मानवीय गलती से?
- कैप्टन की शांति और को-पायलट की घबराहट—क्या इसके पीछे कोई साइकोलॉजिकल फैक्टर था?
- क्या विमान में कोई सिस्टमिक या डिजाइन दोष है?
सरकार का कहना है कि रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है और अंतिम निष्कर्ष निकालने में अभी समय लगेगा।
इस हादसे ने न केवल विमानन क्षेत्र की सुरक्षा प्रणालियों को कठघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि पायलट प्रशिक्षण, मेंटल हेल्थ और कॉकपिट प्रोटोकॉल पर भी सवाल उठाए हैं। जब तक जांच की अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाज़ी होगी।





