आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे पर मध्यप्रदेश का पहला 6-लेन केबल-स्टे ब्रिज बनेगा

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भारत में तेज़ विकास के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की संख्या बढ़ रही है, और इसी कड़ी में आगरा से ग्वालियर तक बनने जा रहे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे पर एक नया इतिहास रचा जाएगा। मध्यप्रदेश में चंबल नदी पर देश का पहला 6-लेन केबल-स्टे ब्रिज बनने जा रहा है, जो राजस्थान-मध्यप्रदेश सीमा पर स्थित राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में बनाया जाएगा। आइए विस्तार से जानते हैं इस महत्वाकांक्षी परियोजना के बारे में।

आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का महत्व

  • लंबाई: कुल 88.40 किलोमीटर
  • रूट: उत्तर प्रदेश और राजस्थान होते हुए मध्यप्रदेश में प्रवेश
  • परियोजना का उद्देश्य: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाना और ट्रैफिक बोझ कम करना
  • विशेषता: मध्यप्रदेश का पहला 6-लेन केबल-स्टे ब्रिज

यह एक्सप्रेस-वे न केवल यात्रा समय को कम करेगा बल्कि व्यापार और पर्यटन को भी नई गति देगा।

चंबल नदी पर बनेगा 600 मीटर लंबा केबल-स्टे ब्रिज

इस ब्रिज की कुछ खास बातें:

  • लंबाई: लगभग 600 मीटर
  • ढांचा: दो विशाल स्तंभों के ऊपर केबल से लटकता हुआ
  • डिजाइन: प्रयागराज के नैनी केबल-स्टे ब्रिज जैसा आधुनिक और मजबूत
  • राज्य: राजस्थान और मध्यप्रदेश को जोड़ेगा
  • पर्यावरण संरक्षण: चंबल अभयारण्य क्षेत्र के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए डिजाइन

केबल-स्टे ब्रिज तकनीक पुल को मजबूत और टिकाऊ बनाती है, जिससे भारी ट्रैफिक को सुचारु रूप से संभाला जा सकेगा।

पर्यावरण और सुरक्षा की मंजूरी (NOC) प्राप्त

इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, वाइल्ड लाइफ एडवाइजरी बोर्ड और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से आवश्यक एनओसी प्राप्त हो चुकी है।

  • पर्यावरण संरक्षण: एक्सप्रेस-वे का लगभग 3 किलोमीटर हिस्सा राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र और इको-सेंसिटिव ज़ोन से गुजरेगा।
  • राजस्थान में भी: 1 किलोमीटर अभयारण्य क्षेत्र से होकर 9 किलोमीटर संरक्षित क्षेत्र में सड़क बनी जाएगी।
  • मध्यप्रदेश मुरैना में: 1.5 किलोमीटर वन क्षेत्र से गुज़रने के लिए राज्य सरकार से अनुमति मिल चुकी है, और संबंधित फीस भी जमा कर दी गई है।

इस प्रकार यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित तरीके से विकसित की जा रही है।

निर्माण का समय और अन्य विवरण

  • निर्माण शुरूआत: नवंबर 2025 से पुल और एक्सप्रेस-वे का निर्माण शुरू होने की उम्मीद
  • तकनीकी प्रबंधन: एनएचएआई के तकनीकी मैनेजर प्रशांत मीणा की देखरेख में
  • ब्रिज की रोशनी: चंबल अभयारण्य के कारण इस पुल पर कोई सजावटी लाइटिंग नहीं होगी, जिससे स्थानीय जीव-जंतु प्रभावित न हों।

क्यों है यह ब्रिज खास?

  • यह मध्यप्रदेश का पहला 6-लेन केबल-स्टे ब्रिज होगा।
  • अत्याधुनिक तकनीक और स्थायित्व का संगम।
  • पर्यावरण की सुरक्षा के साथ उच्च स्तरीय यातायात समाधान।
  • राजस्थान-मध्यप्रदेश के बीच बेहतर कनेक्टिविटी।

तेजी से विकसित होती सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर

आगरा से ग्वालियर तक यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे न केवल यात्रा के समय को कम करेगा, बल्कि राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच आर्थिक और सामाजिक विकास को भी बढ़ावा देगा। चंबल नदी पर बनने वाला यह केबल-स्टे ब्रिज पर्यावरण संरक्षण के साथ आधुनिक इंजीनियरिंग का अनूठा उदाहरण होगा।

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