Madras HC Verdict : करीब एक दशक पहले हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का परिणाम अब जाकर पूरी तरह बदल गया है। मद्रास हाई कोर्ट ने 2016 के राधापुरम विधानसभा क्षेत्र के चुनाव में DMK नेता और वर्तमान में तमिलनाडु राजनीति के वरिष्ठ चेहरों में शामिल M. Appavu को वास्तविक विजेता घोषित कर दिया है। अदालत ने AIADMK उम्मीदवार I. S. Inbadurai की जीत को अमान्य ठहराते हुए चुनाव आयोग को आधिकारिक रिकॉर्ड में संशोधन करने का निर्देश दिया है।
यह फैसला केवल एक सीट के परिणाम को बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी विवादों के निपटारे में होने वाली लंबी देरी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
Madras HC Verdict : क्या था पूरा मामला?
साल 2016 में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान राधापुरम सीट पर मुकाबला बेहद कांटे का रहा। मतगणना के बाद चुनाव आयोग ने AIADMK उम्मीदवार इनबदुरई को मात्र 49 वोटों के अंतर से विजेता घोषित किया था। DMK उम्मीदवार अप्पावु ने इस परिणाम को चुनौती देते हुए मद्रास हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की। उनका आरोप था कि मतगणना के दौरान बड़ी संख्या में डाक मतपत्र (Postal Ballots) गलत तरीके से खारिज कर दिए गए थे, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ।
Madras HC Verdict : विवाद की जड़ में थे पोस्टल बैलेट
अप्पावु की ओर से अदालत में कहा गया कि लगभग 200 से 300 पोस्टल बैलेट केवल इस आधार पर निरस्त कर दिए गए कि उन पर एक स्कूल हेडमास्टर के हस्ताक्षर थे। चुनाव अधिकारियों ने इन्हें वैध नहीं माना।

मामला अदालत पहुंचने पर पोस्टल बैलेट की जांच और पुनर्गणना का आदेश दिया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जिन मतपत्रों को पहले खारिज किया गया था, उनमें से बड़ी संख्या वैध थी। पुनर्गणना में अधिकांश वैध मत अप्पावु के पक्ष में निकले। अदालत ने माना कि इन्हीं मतों की वजह से मूल परिणाम प्रभावित हुआ था।
Madras HC Verdict : कब-कब क्या हुआ? पूरी टाइमलाइन
मई 2016
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव संपन्न हुए।
राधापुरम सीट से AIADMK के आई. एस. इनबदुरई को 49 वोटों से विजयी घोषित किया गया।
DMK उम्मीदवार एम. अप्पावु ने परिणाम को चुनौती दी।
2016-2019
अप्पावु ने मद्रास हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की।
पोस्टल बैलेट की वैधता और मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए।
2019
हाई कोर्ट ने पोस्टल बैलेट और कुछ ईवीएम राउंड की पुनर्गणना का आदेश दिया।
इनबदुरई ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
2019-2026
मामला विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं में उलझा रहा।
इस दौरान 2021 और 2026 के विधानसभा चुनाव भी हो गए।
चुनाव विवाद लंबित रहने से अंतिम फैसला नहीं आ सका।
मई 2026
सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मामले को बंद करते हुए मद्रास हाई कोर्ट को संबंधित याचिका पर उचित आदेश पारित करने की छूट दी।
3 जून 2026
न्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन ने फैसला सुनाया।
इनबदुरई की जीत को अमान्य घोषित किया।
अप्पावु को 2016-2021 कार्यकाल का वास्तविक विधायक माना गया।
चुनाव आयोग को रिकॉर्ड संशोधित करने का निर्देश दिया गया।
Madras HC Verdict : अदालत ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों और पुनर्गणना के आधार पर यह स्पष्ट है कि वास्तविक विजेता अप्पावु थे, न कि इनबदुरई। इसलिए चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में संशोधन किया जाना चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा कि चुनाव याचिकाओं का वर्षों तक लंबित रहना लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि यदि चुनावी विवादों का समय पर निपटारा नहीं होगा तो मतदाताओं के जनादेश का महत्व कम हो सकता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है।
Madras HC Verdict : अप्पावु को क्या मिलेगा?
आधिकारिक रिकॉर्ड में 2016-2021 के विधायक के रूप में अप्पावु का नाम दर्ज होगा।
उन्हें उस अवधि से जुड़े वैधानिक और प्रशासनिक लाभ दिए जा सकते हैं।
विधानसभा और सरकारी दस्तावेजों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।
हालांकि यह फैसला बीते कार्यकाल से जुड़ा है, इसलिए अब सीट पर किसी प्रकार का उपचुनाव नहीं होगा क्योंकि वह विधानसभा अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी है।
Madras HC Verdict : आगे क्या होगा?
मामले का राजनीतिक और कानूनी असर अभी बाकी है। इनबदुरई ने संकेत दिया है कि वे इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती दे सकते हैं। यदि अपील दायर होती है तो मामला फिर से न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ सकता है।
फिलहाल मद्रास हाई कोर्ट का आदेश लागू होने पर चुनाव आयोग को रिकॉर्ड बदलना होगा और लगभग दस साल बाद यह स्वीकार करना होगा कि 2016 में राधापुरम सीट पर जनता का असली जनादेश अप्पावु के पक्ष में था।
यह फैसला भारतीय चुनावी इतिहास के उन दुर्लभ मामलों में शामिल हो गया है, जहां चुनाव परिणाम घोषित होने और पूरा कार्यकाल समाप्त हो जाने के वर्षों बाद अदालत ने वास्तविक विजेता को मान्यता दी है।

