बहन रोहणी का आरोप, तेजस्वी ने अपशब्द कहे, लालू राबड़ी दे रहे समझाईश
by: vijay nandan
पटना: जब घर ही रणभूमि बन जाए, जब राजनीति का तूफ़ान परिवार की चौखट तोड़कर अंदर घुस आए और जब सत्ता की गद्दी की लड़ाई रिश्तों को ही निगलने लगे, तो समझ लीजिए कि घर में ही महाभारत शुरू हो चुका है। बिहार की राजनीति में भी ठीक यही तस्वीर सामने आई है। जहाँ एक ही परिवार के भीतर आरोप, गुस्सा, तकरार और तंजों का ऐसा दौर चला कि अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह लड़ाई चुनावी हार की देन है या फिर वर्षों से सुलग रही उस आग का धुआँ, जो अब खुलकर सामने आ रहा है?
दरअसल बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव का परिवार गहरे विवाद में उलझ गया है। परिवार के भीतर जो तनाव आज सामने दिख रहा है, उसकी नींव करीब ढाई साल पहले ही पड़ चुकी थी। इस पूरे प्रकरण में तेजस्वी यादव के नजदीकी माने जाने वाले संजय यादव का नाम बार-बार चर्चा में आ रहा है।

चुनाव नतीजे आने के तुरंत बाद परिवार में असहमति खुलकर सामने आ गई। सबसे पहले लालू-राबड़ी की बेटी रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी यादव के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए घर छोड़ दिया। रोहिणी के बाद उनकी तीन बहनें रागिनी, चंदा और राजलक्ष्मी ने भी घर से दूर रहने का फैसला कर लिया। तेज प्रताप यादव को लालू पहले ही पार्टी और परिवार दोनों से किनारे कर चुके थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसी कौनसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने आरजेडी परिवार को पूरी तरह तोड़कर रख दिया।
सूत्रों के अनुसार, परिवार में दरार की शुरुआत एक समीक्षा बैठक में हुए तीखे विवाद से हुई। खबरों के मुताबिक, रोहिणी ने बैठक में तेजस्वी से पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा संजय यादव के खिलाफ की जा रही नाराज़गी पर ध्यान देने को कहा था। इस टिप्पणी पर तेजस्वी नाराज़ हो गए और दोनों के बीच बहस बढ़ती चली गई। खबर ये है कि बहस इतनी गंभीर हो गई कि तेजस्वी ने रोहिणी पर बेहद आपत्तिजनक शब्द भी कहे और माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। रोहिणी ने बाद में सार्वजनिक रूप से संजय यादव और रमीज नेमत खान को इस विवाद के लिए जिम्मेदार बताया।
प्रचार के दौरान भी बढ़ी खींचतान
खबरों के अनुसार, तेजस्वी यादव ने ही रोहिणी को चुनाव प्रचार के लिए सिंगापुर से बुलाया था, ताकि वे राघोपुर में उनकी मदद कर सकें। रोहिणी चाहती थीं कि उन्हें सारण की सभी सीटों पर प्रचार की अनुमति मिले, लेकिन तेजस्वी ने केवल राघोपुर तक ही सीमित रहने को कहा। इससे रोहिणी के मन में असंतोष और गहराया।
कहा जाता है कि 2024 लोकसभा चुनाव से काफी पहले ही तेजस्वी ने रोहिणी से सारण सीट से चुनाव लड़ने का आग्रह किया था। रोहिणी पाटलिपुत्र से चुनाव लड़ना चाहती थीं, लेकिन परिवार में इसे लेकर असहमति बनी रही, हालांकि लालू यादव की हामी के बाद रोहिणी ने सारण से चुनाव लड़ा, लेकिन शुरू से ही वह वहां सहज महसूस कर रही थीं और अंततः चुनाव हार गईं। चुनाव परिणाम ने उनके अंदर पहले से चल रहे दबाव और उपेक्षा की भावना को और बढ़ा दिया।
तेजस्वी के करीबी संजय यादव के कारण ‘घर में महाभारत’
सूत्रों का दावा है कि संजय यादव का परिवार पर प्रभाव बढ़ने के समय से ही रोहिणी के साथ उनका टकराव शुरू हुआ। बताया जाता है कि संजय ने कई मौकों पर रोहिणी को राजनीति से दूर रहने और सिंगापुर लौट जाने तक की सलाह दी थी। इससे परिवार के भीतर अविश्वास बढ़ता गया। चुनावी टिकट वितरण के दौरान भी रोहिणी को झटका लगा। जिन दो विधायकों ने सारण में उनकी हार को बार-बार मुद्दा बनाया, उन्हीं को इस विधानसभा चुनाव में आसानी से टिकट दे दिया गया। इससे उनके मन में यह धारणा और मजबूत हुई कि पार्टी के भीतर ही उन्हें कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।





