BY: Yoganand Shrivastva
इंदौर और खंडवा को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित ब्रॉडगेज रेल परियोजना को अब आखिरकार गति मिलने वाली है। वन विभाग ने इस रेल मार्ग के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर दिया है, जिससे इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी बाधा दूर हो गई है।
उत्तर से दक्षिण भारत के लिए सबसे छोटा सीधा रेल रूट बनेगा
यह रेल लाइन उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने वाला सबसे छोटा और सुविधाजनक मार्ग बनने जा रही है। इसके पूरा होने से न केवल इंदौर जैसे वाणिज्यिक शहर का संपर्क बढ़ेगा, बल्कि आम यात्रियों को भी कम समय में लंबी दूरी तय करने में राहत मिलेगी। यह मार्ग खंडवा, भुसावल, नासिक और मुंबई होते हुए हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों तक की सीधी पहुंच प्रदान करेगा।
सांसद शंकर लालवानी की भूमिका
इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने इस प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित करने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए। उन्होंने वन विभाग और रेलवे अधिकारियों की संयुक्त बैठकें करवाईं और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी विशेष अनुरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप वन विभाग से यह अनुमति मिल सकी।
व्यापार, किसान और यात्रियों को होगा सीधा फायदा
यह रेल कॉरिडोर मालवांचल क्षेत्र के व्यापारियों, किसानों और यात्रियों के लिए वरदान साबित होगा। माल ढुलाई आसान होगी, किसान अपनी उपज दूरदराज तक भेज सकेंगे और यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
रेलवे को भी इससे राजस्व में बड़ा फायदा होगा, क्योंकि यात्रा का समय और दूरी घटने से यात्रियों की संख्या में इजाफा होगा।
वन भूमि की चुनौती अब खत्म
ब्रॉडगेज लाइन महू, पातालपानी, बलवाड़ा, बड़वाह, चौरल होते हुए खंडवा तक जाएगी। इस रूट में कई स्थान जंगलों से होकर गुजरते हैं और लगभग 454 हेक्टेयर वन भूमि इस ट्रैक में आ रही थी। इस भूमि को लेकर वन विभाग से कई वर्षों से अनुमति लंबित थी, जिसे अब NOC मिलने के बाद मंजूरी मिल गई है।
10 साल से टूटी रेल कनेक्टिविटी को मिलेगा नया जीवन
पिछले एक दशक से इंदौर से खंडवा के बीच मीटर गेज रेल सेवा बंद थी। अब ब्रॉडगेज लाइन के निर्माण के बाद इंदौर से सीधे दक्षिण भारतीय शहरों तक सफर संभव हो जाएगा। यह परियोजना इंदौर की यातायात संरचना, व्यापारिक विस्तार और क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से मील का पत्थर साबित होगी।





