Aaj ka Panchang: 24 सितंबर 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। आज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि रहेगी, जो रात 11:19 बजे तक चलेगी। गुरुवार होने के कारण आज का दिन धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ, अध्ययन और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए भी विशेष माना जाता है। पंचांग में आज तिथि के साथ नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल, गुलिक काल, यमघण्टकाल और दिशाशूल की जानकारी भी महत्वपूर्ण रहेगी।
24 सितंबर 2026 को कौन सी तिथि रहेगी
आज शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि रात 11:19 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू होगी। धार्मिक मान्यताओं में शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को महत्वपूर्ण माना जाता है और इसका संबंध प्रदोष व्रत से भी होता है। हालांकि प्रदोष पूजा और व्रत के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार प्रदोष काल और अन्य नियमों को देखना उचित माना जाता है।
आज कौन सा वार और मास है
24 सितंबर को गुरुवार है। पंचांग की गणना के अनुसार आज पूर्णिमांत और अमांत दोनों पद्धतियों में भाद्रपद मास चल रहा है। आज विक्रम संवत 2083, जिसे सिद्धार्थ संवत कहा गया है, प्रभावी है। वहीं शक संवत 1948 प्रभाउ है। ऋतु की बात करें तो इस समय शरद ऋतु चल रही है और अयन की गणना के अनुसार दक्षिणायन है।
आज का नक्षत्र क्या रहेगा
24 सितंबर को धनिष्ठा नक्षत्र सुबह 10:36 बजे तक रहेगा। इसके बाद नक्षत्र परिवर्तन होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में धनिष्ठा नक्षत्र को सक्रियता, ऊर्जा, अनुशासन और सामूहिक प्रयासों से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए आज दिन के अलग-अलग समय में नक्षत्र परिवर्तन के अनुसार पंचांग की स्थिति भी बदलती रहेगी।
आज का योग और करण
आज धृति योग दोपहर 3:55 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय परंपरा में धृति योग को स्थिरता और धैर्य से संबंधित माना जाता है। वहीं कौलव करण सुबह 11:06 बजे तक रहेगा, इसके बाद करण में परिवर्तन होगा। इस वजह से आज सुबह से दोपहर तक पंचांग की कई गणनाओं में बदलाव देखने को मिलेगा।
24 सितंबर का सूर्योदय और सूर्यास्त
आज सूर्योदय सुबह 5:48 बजे और सूर्यास्त शाम 5:53 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 4:28 बजे के आसपास होगा, जबकि चंद्रास्त अगले दिन सुबह 3:20 बजे रहेगा। पंचांग के अनुसार आज सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा कुम्भ राशि में स्थित रहेगा। चंद्रमा का निवास पश्चिम दिशा में माना गया है।
आज का शुभ मुहूर्त
24 सितंबर को शुभ मुहूर्त सुबह 11:27 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक रहेगा। पंचांग की मान्यताओं के अनुसार इस अवधि को महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शुभ समय माना जाता है। किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान, पूजा या नए कार्य की शुरुआत से पहले स्थानीय पंचांग और संबंधित परंपरा के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
आज का राहुकाल
गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को राहुकाल दोपहर 1:21 बजे से 2:52 बजे तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं में राहुकाल के दौरान नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि पहले से निर्धारित या जरूरी काम अपनी परिस्थितियों के अनुसार किए जा सकते हैं।
आज का गुलिक काल और यमघण्टकाल
आज गुलिक काल सुबह 8:49 बजे से 10:20 बजे तक रहेगा। वहीं यमघण्टकाल सुबह 5:48 बजे से 7:19 बजे तक रहेगा। पंचांग परंपरा में इन अवधियों को महत्वपूर्ण नए कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है। किसी शुभ कार्य की योजना बनाते समय इन समय सीमाओं को ध्यान में रखा जा सकता है।
आज किस दिशा में रहेगा दिशाशूल
24 सितंबर को दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करने से पहले पंचांग संबंधी सावधानी बरतने की परंपरा है। यदि दक्षिण दिशा की यात्रा जरूरी हो, तो वास्तविक यात्रा परिस्थितियों के साथ स्थानीय पंचांग की गणना को भी ध्यान में रखा जा सकता है।
आज सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
आज सूर्य कन्या राशि में रहेगा, जबकि चंद्रमा कुम्भ राशि में स्थित रहेगा। पंचांग में सूर्य और चंद्रमा की राशिगत स्थिति को तिथि, नक्षत्र, योग और करण के साथ देखा जाता है। चंद्रमा के कुम्भ राशि में रहने के कारण आज की दैनिक ज्योतिषीय गणना में इसकी स्थिति विशेष महत्व रखती है।
24 सितंबर का पंचांग एक नजर में
24 सितंबर 2026 को शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी रात 11:19 बजे तक रहेगी। दिन गुरुवार का है और भाद्रपद मास चल रहा है। धनिष्ठा नक्षत्र सुबह 10:36 बजे तक, धृति योग दोपहर 3:55 बजे तक और कौलव करण सुबह 11:06 बजे तक रहेगा। शुभ मुहूर्त सुबह 11:27 से दोपहर 12:15 बजे तक है। राहुकाल दोपहर 1:21 से 2:52 बजे तक, गुलिक काल सुबह 8:49 से 10:20 बजे तक और यमघण्टकाल सुबह 5:48 से 7:19 बजे तक रहेगा। दिशाशूल दक्षिण दिशा में माना गया है।
धार्मिक कार्यों के लिए आज का महत्व
आज त्रयोदशी तिथि होने के कारण धार्मिक दृष्टि से दिन का महत्व बढ़ जाता है। गुरुवार को भी पारंपरिक रूप से गुरु ग्रह और देवगुरु बृहस्पति से जोड़ा जाता है। ऐसे में पूजा-पाठ, अध्ययन, आध्यात्मिक गतिविधियों और धार्मिक साधना के लिए दिन को महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रदोष व्रत या पूजा करने वाले श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय क्षेत्र के पंचांग के अनुसार प्रदोष काल और पूजा विधि की पुष्टि करनी चाहिए।
पंचांग में दिए गए समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। इसलिए किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान, व्रत या शुभ कार्य के लिए स्थानीय सूर्योदय और क्षेत्रीय पंचांग को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।


