इंदौर में विजय नगर में होगा भव्य रावण दहन, 61 फीट ऊंचे पुतले का दहन

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रिपोर्ट: देवेंद्र जायसवाल

इंदौर: विजय नगर रावण दहन समिति के द्वारा इस वर्ष भी रावण दहन का आयोजन किया जावेगा। आयोजनकर्ता दिपेश यादव समिति द्वारा लगातार 1982 से रावण दहन का कार्यक्रम किया जा रहा है। यह इसका 43वां वर्ष है, इस वर्ष भी 61 फीट ऊचें रावण का दहन किया जाएगा। कार्यक्रम स्थल पर विशाल भजन संध्या गन्नू महाराज मंडली द्वारा होगी । जिसमें राम, जानकी, राधाकृष्ण, हनुमान, शिवपार्वती की प्रस्तुति कलाकारों द्वारा दी जायेगी। रावण दहन भाजपा के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक रमेश मैंदोला एवं क्षेत्र के पार्षदों सहित शहर के सम्मानीय अतिथियों द्वारा किया जाएगा। रंगारंग आतिशबाजी के साथ आयोजन होगा। दर्शकों को बैठने के लिये समिति द्वारा कुर्सी की व्यवस्था की जायेगी। राम सीता, हनुमान की विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी। रावण दहन रात्रि 9.00 बजे विजय नगर चौराहे के पास किया जाएगा।

इसलिए किया जाता है रावण दहन


दशहरे पर हर साल की तरह इस बार भी देशभर में रावण दहन का आयोजन किया लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर रावण दहन क्यों किया जाता है हिंदू मान्यताओं के अनुसार त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने बुराई के प्रतीक रावण का वध किया तभी से दशहरे के दिन रावण दहन की परंपरा शुरू हुई दहन असत्य पर सत्य की जीत और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है साथ ही यह अहंकार को त्यागने का संदेश भी देता हैकहा जाता है कि रावण बहुत बड़ा विद्वान और शिव भक्त था लेकिन उसके अहंकार और अधर्म ने उसका पतन किया इसलिए रावण दहन हमें यह सीख देता है कि जीवन में चाहे कितनी भी शक्ति और ज्ञान हो अगर उसमें विनम्रता और धर्म नहीं है तो उसका अंत निश्चित है सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी रावण दहन का महत्व है यह समाज को संदेश देता है कि लोभए क्रोधए अहंकार और बुराई जैसी आदतों को हमें अपने जीवन से जलाना चाहिए शहरे के दिन रावण दहन को नए आरंभ का प्रतीक भी माना जाता है इस दिन से शुभ कार्यों की शुरुआत करने की परंपरा है यानी हर साल दशहरा हमें यही याद दिलाता है कि धर्म और सत्य की राह पर चलकर ही जीवन सफल होता है और बुराई का अंत निश्चित है

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