BY: Yoganand Shrivastva
जबलपुर: शिवराज बस्ती में हाल ही में लगाए गए पोस्टर लोगों को चिंता में डाल रहे हैं। पोस्टरों में लिखा है कि “मकान बेचना है”, जो बस्ती के निवासियों ने अपने घरों के बाहर लगाए हैं। स्थानीय लोग इस घटना को कुछ अनजान व्यक्तियों के अचानक बस्ती में बसने से जोड़ रहे हैं। कुछ इसे रोहिंग्या या संदिग्ध रैकी करने वाले लोगों से जोड़ रहे हैं।
हिंदू संगठनों को जानकारी मिलते ही उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। जांच में सामने आया कि बस्ती में करीब 10 से अधिक परिवार, लगभग 50 लोग झोपड़ियों में रह रहे थे और गंदगी फैलाने की शिकायत भी मिली।
बस्ती में हुई हलचल
नर्मदा नदी किनारे बसी शिवराज बस्ती पहले सामान्य स्थिति में थी। तीन सप्ताह पहले मकान बिक्री के पोस्टर दिखाई दिए। कई लोग अपने घरों में ताला लगाकर कहीं और चले गए।
स्थानीय हिंदूवादी संगठनों का दावा है कि इन नए बसे लोगों ने मांस के टुकड़े फेंककर गंदगी फैलाई। कुछ ने झोपड़ियां बनाई, जबकि कुछ ने कमरे किराए पर लिए।स्थानीय निवासी बताते हैं कि ये लोग दिनभर भीख मांगते हैं और घरों का निरीक्षण करते हैं, जिससे चोरी की आशंका बनती है। विरोध करने पर ये लोग महिलाओं को अपमानजनक तरीके से डराने की घटनाएं भी करते हैं।
झोपड़ियों की संख्या में वृद्धि
पहले बस्ती में केवल एक झोपड़ी थी, लेकिन धीरे-धीरे संख्या बढ़ती गई। कुछ लोग कमरे किराए पर लेकर रह रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यह प्रवृत्ति जारी रही तो इनको हटाना मुश्किल हो जाएगा।बजरंग दल के प्रचारक रमेश तिवारी ने कहा कि बस्ती में फैल रही गंदगी और कई कुत्तों की वजह से हालात बिगड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बिना दस्तावेज़ों वाले लोगों को बस्ती में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
दस्तावेज़ और पहचान
पुलिस ने यह भी जांच करने का निर्णय लिया कि बस्ती में रहने वाले लोगों के आधार कार्ड या अन्य पहचान दस्तावेज़ कहां और कैसे बने।
स्थानीय निवासियों और बसे लोगों में मतभेद
कुछ स्थानीय निवासी जैसे कमला बैन का कहना है कि ये लोग अपना जीवन यापन कर रहे हैं और कोई परेशानी नहीं करते। वहीं कुछ लोग इनकी वजह से गंदगी और असुविधा बढ़ने की बात कहते हैं।कुछ लोग कमरे किराए पर देकर इन लोगों के बस्ती में रहने का समर्थन कर रहे हैं, जबकि बाकी विरोध कर रहे हैं।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
शिकायतों के बाद जबलपुर एसपी संपत उपाध्याय ने ग्वारीघाट थाना प्रभारी को जांच के निर्देश दिए। थाना प्रभारी सुभाषचंद्र बघेल ने बताया कि अवैध रूप से झोपड़ी बनाने या कमरे किराए पर लेकर रहने वाले लोगों को हटाया जा रहा है।जांच में यह सामने आया कि बस्ती में रहने वाले कुछ लोग महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के निवासी हैं और खानाबदोश जीवन जीते हैं।





