भारत में पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने की नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें इथेनॉल-फ्री पेट्रोल का विकल्प देने की मांग की गई थी। इस फैसले के बाद साफ है कि देशवासियों को अब केवल 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP-20) ही मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
- याचिका में कहा गया था कि 2023 से पहले बने वाहनों के लिए 20% इथेनॉल वाला पेट्रोल उपयुक्त नहीं है।
- याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इससे वाहनों का माइलेज 6% तक कम होता है और पुराने वाहनों को नुकसान भी हो सकता है।
- हालांकि, कोर्ट ने सरकार और अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि की दलील सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी।
सरकार का पक्ष
- अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह नीति सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे किसानों और गन्ना व्यापारियों का हित जुड़ा है।
- उन्होंने आरोप लगाया कि याचिका के पीछे एक बड़ी लॉबी काम कर रही है।
- सरकार के मुताबिक, इथेनॉल ब्लेंडिंग से गन्ना किसानों की आय बढ़ेगी और देश का आयात बिल कम होगा।
इथेनॉल ब्लेंडिंग क्यों?
- भारत सरकार ने 2030 तक 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखा है।
- इसके फायदे:
- गन्ना किसानों को ऊंचे दाम मिलते हैं।
- पेट्रोल पर निर्भरता घटती है और क्रूड ऑयल इंपोर्ट कम होता है।
- पर्यावरण प्रदूषण घटाने में मदद मिलती है।
- नुकसान की आशंका:
- पुराने वाहनों का माइलेज कम हो सकता है।
- कुछ इंजनों पर तकनीकी असर पड़ने की संभावना रहती है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला साफ करता है कि भारत में 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल ही मानक ईंधन रहेगा। यानी, जो लोग इथेनॉल-फ्री पेट्रोल की उम्मीद लगाए बैठे थे, उन्हें अब कोई विकल्प नहीं मिलेगा। सरकार का जोर है कि यह नीति किसानों, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण सभी के लिए फायदेमंद है।





