रूस पर ऊर्जा सेक्टर से जुड़े कड़े प्रतिबंध लगाने वाला अमेरिका अब खुद व्यापार करने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, 15 अगस्त को अलास्का में हुई ट्रम्प-पुतिन की तीन घंटे लंबी बैठक में ऊर्जा समझौते और व्यापार पर गहन चर्चा हुई।
ऊर्जा डील और न्यूक्लियर शिप्स पर विचार
- Exxon Mobil रूस के सखालिन-1 प्रोजेक्ट में फिर से शामिल होना चाहती है।
- रूस को अमेरिकी इक्विपमेंट बेचने पर बातचीत हुई।
- अमेरिका, रूस से न्यूक्लियर एनर्जी आइस ब्रेकर शिप्स खरीदने की योजना बना रहा है।
यह वही अमेरिका है जिसने 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद रूस को विदेशी निवेश से काट दिया था। अब शांति वार्ता आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबंधों में ढील की संभावना है।
व्हाइट हाउस का प्लान
एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प चाहते थे कि 15 अगस्त की बैठक के बाद बड़ा निवेश सौदा घोषित हो, लेकिन लंबी चर्चा के बावजूद कोई ठोस समझौता नहीं हुआ।
इससे पहले 6 अगस्त को अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ ने मॉस्को में पुतिन और रूसी निवेश प्रतिनिधि किरिल दिमित्रिएव से बातचीत की थी।
अमेरिका खुद भी रूस से व्यापार कर रहा
भले ही अमेरिका भारत पर रूसी तेल खरीदने को लेकर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा चुका है, लेकिन खुद वह रूस से अरबों डॉलर का सामान खरीद रहा है।
- 2024 में अमेरिका-रूस के बीच ₹43 हजार करोड़ का व्यापार हुआ।
- अमेरिका ने रूस को 52.83 करोड़ डॉलर (₹44 अरब) का निर्यात किया।
- रूस से 3 अरब डॉलर (₹252 अरब) का आयात किया गया।
अमेरिका, रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, पैलेडियम, उर्वरक और केमिकल्स भी इंपोर्ट करता है।
भारत पर अमेरिकी दबाव
ट्रम्प ने भारत पर दो बार टैरिफ लगाया है:
- जुलाई 2025 में 25%
- अगस्त 2025 में अतिरिक्त 25%
अब अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान पर कुल 50% टैरिफ देना होगा।
क्यों लगा टैरिफ?
भारत, चीन के बाद रूस से तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है।
- युद्ध से पहले भारत रूस से केवल 0.2% (68 हजार बैरल/दिन) तेल खरीदता था।
- मई 2023 तक यह बढ़कर 45% (20 लाख बैरल/दिन) हो गया।
- 2025 में (जनवरी-जुलाई) भारत हर दिन 17.8 लाख बैरल तेल रूस से खरीद रहा है।
पिछले दो सालों में भारत ने रूस से हर साल $130 अरब (₹11.33 लाख करोड़) से अधिक का तेल खरीदा है।
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अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अगर रूस-यूक्रेन युद्ध में प्रगति होती है तो कुछ देशों पर टैरिफ घटाए जा सकते हैं। हालांकि जरूरत पड़ने पर इन्हें और बढ़ाया भी जा सकता है।
अमेरिका फिलहाल रूस और यूक्रेन दोनों से बातचीत करके युद्ध खत्म करने का रास्ता तलाश रहा है।





