भारत और अमेरिका के संबंध इन दिनों जटिल दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सर्जियो गोर को भारत का नया राजदूत नियुक्त किया है। गोर लंबे समय से ट्रंप के राजनीतिक और व्यक्तिगत विश्वासपात्र रहे हैं। उनकी नियुक्ति न केवल राजनयिक दृष्टिकोण से अहम है, बल्कि आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा भी तय कर सकती है।
कौन हैं सर्जियो गोर?
- ट्रंप के पुराने सहयोगी: सर्जियो गोर डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक अभियानों और सुपर PACs में अहम भूमिका निभा चुके हैं।
- पुस्तक प्रकाशन से जुड़ाव: उन्होंने ट्रंप की बेस्टसेलिंग किताबों के प्रकाशन में भी सहयोग किया।
- वर्तमान पद: व्हाइट हाउस में प्रेसिडेंशियल पर्सनल ऑफिस के डायरेक्टर हैं, जहां उन्होंने 4,000 से अधिक नियुक्तियां कीं।
- नई भूमिका: भारत के 26वें अमेरिकी राजदूत और दक्षिण एवं मध्य एशिया के विशेष दूत होंगे।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर की घोषणा
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर गोर की नियुक्ति की घोषणा करते हुए लिखा:
- “सर्जियो मेरे भरोसेमंद मित्र हैं, जिन्होंने वर्षों तक मेरा साथ दिया।”
- “उन्होंने मेरे ऐतिहासिक चुनाव अभियानों में काम किया और हमारे आंदोलन का समर्थन करने वाले बड़े सुपर PAC का नेतृत्व किया।”
- “वे एक शानदार राजदूत साबित होंगे और भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाई देंगे।”
क्यों अहम है यह नियुक्ति?
सर्जियो गोर की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब:
- अमेरिका ने भारत के आयातों पर टैरिफ बढ़ाने का फैसला किया है।
- भारत रूस से ऊर्जा और रक्षा सौदों को जारी रखे हुए है।
- चीन और पाकिस्तान को लेकर क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है।
इन परिस्थितियों में गोर को नाजुक कूटनीतिक हालात संभालने होंगे।
सर्जियो गोर के सामने बड़ी चुनौतियां
- व्यापारिक विवाद सुलझाना: अमेरिका के टैरिफ फैसलों से दोनों देशों के बीच तनाव है। गोर को एक संतुलित समझौता ढूंढना होगा।
- भारत-रूस संबंध: भारत के ऐतिहासिक रक्षा और ऊर्जा सहयोग को देखते हुए गोर के लिए अमेरिका के हित साधना आसान नहीं होगा।
- चीन और पाकिस्तान पर रणनीति: इस क्षेत्र में अमेरिका के प्रभाव को मजबूत रखना एक अहम जिम्मेदारी होगी।
- अनुभव की कमी: गोर की पृष्ठभूमि राजनीतिक है, जबकि राजनयिक अनुभव सीमित है। भारतीय राजनीति, नौकरशाही और सांस्कृतिक विविधता को समझना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।
सर्जियो गोर की नियुक्ति राष्ट्रपति ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का सीधा संकेत है। हालांकि वे एक पारंपरिक राजनयिक नहीं हैं, लेकिन ट्रंप के करीबी और भरोसेमंद सहयोगी होने के नाते उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि गोर भारत-अमेरिका संबंधों की जटिलताओं को कैसे संभालते हैं और दोनों देशों के बीच साझेदारी को किस दिशा में ले जाते हैं।





