वाशिंगटन: रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष जारी है, और इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन की रक्षा के लिए अमेरिकी सैनिक नहीं भेजने का बड़ा बयान दिया है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब ट्रंप ने हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की दोनों से मुलाकात की है।
ट्रंप का स्पष्ट संदेश
ट्रंप ने एक टीवी साक्षात्कार में कहा:
- अमेरिका रूस के खिलाफ यूक्रेन की प्रत्यक्ष रक्षा में सैनिक नहीं भेजेगा।
- उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन का NATO में शामिल होना या क्रीमिया वापस पाने की उम्मीदें पूरी करना असंभव है।
यह बयान उनके राजनीतिक रुख में बदलाव को दर्शाता है और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर नया असर डाल सकता है।
पहले क्या कहा था ट्रंप ने?
हाल ही में व्हाइट हाउस में ट्रंप ने जेलेंस्की और अन्य यूरोपीय नेताओं के साथ बैठक की थी। उस समय उन्होंने कहा था कि यूक्रेन की रक्षा के लिए यूरोपीय नेतृत्व वाले प्रयास में अमेरिका शामिल हो सकता है, यानी अमेरिकी सैनिक भेजने की संभावना पर स्पष्ट इंकार नहीं किया गया था।
बदल गए ट्रंप के सुर
- पहले ट्रंप सीजफायर समझौते पर जोर दे रहे थे।
- अब उन्होंने सीधे शांति समझौते की बात शुरू कर दी है।
- ट्रंप का मानना है कि यूक्रेन और रूस के बीच जंग को खत्म करने का सबसे बेहतर तरीका सीधे बातचीत और शांति समझौता है, ना कि केवल अस्थायी सीजफायर।
इस बदलाव से यह स्पष्ट होता है कि ट्रंप की प्राथमिकता अब सैनिक भेजने के बजाय कूटनीतिक समाधान पर केंद्रित है।
ट्रंप का यह बयान न केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा करेगा बल्कि यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे संघर्ष के भविष्य पर भी असर डाल सकता है। अमेरिकी सैनिक न भेजने का निर्णय और सीधा शांति समझौते का रुख दोनों ही वैश्विक रणनीति में अहम मोड़ साबित हो सकते हैं।





