पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को राजधानी इस्लामाबाद में भारत को सिंधु जल संधि को स्थगित करने पर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से “एक बूंद पानी भी नहीं छीनी जा सकती” और अगर भारत ने ऐसा करने की कोशिश की, तो उसे जीवन भर याद रहने वाला सबक मिलेगा।
“दुश्मन (भारत) ने हमें पानी रोकने की धमकी दी। अगर ऐसा किया गया तो पाकिस्तान निर्णायक कदम उठाएगा,” शहबाज ने कहा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पानी पाकिस्तान की लाइफलाइन है और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत देश के अधिकारों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
बिलावल भुट्टो ने भी दी भारत को चेतावनी
शहबाज शरीफ से पहले पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने भारत को युद्ध की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर भारत सिंधु जल संधि को निलंबित रखता है, तो पाकिस्तान के पास युद्ध के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
“मोदी सरकार के कदमों ने पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचाया है। हमें एकजुट होकर इन आक्रामक नीतियों का जवाब देना होगा,” बिलावल ने कहा।
उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के लोग छह नदियों के पानी को सुरक्षित करने के लिए युद्ध करने में सक्षम हैं।
48 घंटे में तीन नेताओं ने दी धमकी
पिछले 48 घंटों में भारत के खिलाफ धमकी देने वाले पाकिस्तानी नेताओं में शामिल हैं:
- आर्मी चीफ आसिम मुनीर
बयान: “अगर भारत सिंधु नदी के पानी पर कोई बांध बनाता है तो पाकिस्तान उसे 10 मिसाइलों से नष्ट कर देगा।”
- प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ
- पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो
इन बयानों ने भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल विवाद को और गर्मा दिया है।
सिंधु जल समझौता क्या है?
सिंधु नदी प्रणाली में छह मुख्य नदियाँ हैं: सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज।
- नदी किनारे का क्षेत्रफल लगभग 11.2 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है।
- इसका 47% हिस्सा पाकिस्तान, 39% भारत, 8% चीन और 6% अफगानिस्तान में है।
- करीब 30 करोड़ लोग इन क्षेत्रों में रहते हैं।
इतिहास:
- 1947 में भारत-पाक के बंटवारे के बाद नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हुआ।
- 1948 में स्टैंडस्टिल समझौते के तहत पाकिस्तान को पानी दिया गया।
- 1960 में वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में इंडस वाटर ट्रीटी (सिंधु जल संधि) पर भारत और पाकिस्तान ने कराची में हस्ताक्षर किए।
भारत ने समझौता रद्द किया
भारत ने 24 अप्रैल को 65 साल पुराने सिंधु जल समझौते को रोक दिया। यह कदम पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद लिया गया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे।
इस निर्णय ने पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया और नेताओं ने भारत को कड़ी चेतावनी दी है।





