रिपोर्ट- धर्मेंद्र पटेल
Contents
रामगढ़, झारखंड – केंद्रीय सरकार द्वारा चार श्रम कानूनों (लेबर कोड) लागू करने के विरोध में आज देशव्यापी हड़ताल के आह्वान का समर्थन जताते हुए, रामगढ़ जिले में एनटीपीसी–पीवीयूएनएल से जुड़े मजदूरों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
धरना और गोलबंदी
- स्थान: एनटीपीसी–पीवीयूएनएल “ए गेट” के बाहर।
- मजदूर यूनियन (एटक–पीवीयूएनएल शाखा) के आह्वान पर सभी श्रमिकों ने गोलबंद होकर ए गेट के पास प्रदर्शन किया।
- उन्होंने निर्माणाधीन प्लांट के अंदर जाने से इनकार कर काम रोका।
- हालांकि, कुछ संविदा मजदूर और एजेंसियाँ सुबह 5 बजे से ही बुलाए गए श्रमिकों को काम पर लगा चुकी थीं और उन्हें प्लांट में प्रवेश दे दिया गया।
प्रवेश में सेंध
- traditionally, सीआईएसएफ की मौजूदगी के बावजूद प्लांट में किसी को ‘ए गेट’ से प्रवेश नहीं मिला करता था।
- लेकिन इस बार कुछ मजदूरों को बिना रोकटोक भीतर जाने दिया गया, जिस पर यूनियन का आरोप है कि सीआईएसएफ इस पर चुप है और स्पष्ट तौर पर कुछ भी बयां नहीं कर रही है।
यूनियन का बयान
- मनोज कुमार (एनटीपीसी–एटक शाखा सचिव) ने मीडिया को बताया कि मजदूरों का दबदबा स्पष्ट था और समर्थन मिल रहा है।
- उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार नई श्रम कानून—चार लेबर कोड—मजदूरों को गुलाम बनाने का काम कर रही है, जो एटक कभी होने नहीं देगा।”
प्रस्तावित कार्यकर्ता कोड का विरोध
- यूनियन का आरोप है कि 44 पुराने श्रम कानून रद्द कर चार नए लेबर कोड लाए जा रहे हैं, जो मजदूरों का हक मारने वाले हैं।
- झारखंड सहित पूरे भारत में सीटू, एटक, एचएमएस, इंटक व अन्य यूनियनों ने 20 मई और 9 जुलाई को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की मुहिम चलाई है।
- झारखंड की विभिन्न मजदूर यूनियनों की बैठक में 9 जुलाई हड़ताल को सफल बनाने का निर्णय लिया गया।
स्थिति का विश्लेषण
परंपरागत सुरक्षा व्यवस्था को ताक पर रखकर श्रमिकों से ए गेट से प्रवेश कराए जाने की बात जरूर हैरान कर देगी। इससे पता चलता है कि फिलहाल आंदोलन स्थल पर प्रभाव जमाने की कोशिश की जा रही है। यूनियन का “गुलामी” तक का आरोप और समर्थन इसी रणनीति की दिशा दिखा रहा है।
महत्वपूर्ण बिंदु
| प्रश्न | जानकारी |
|---|---|
| कब हड़ताल हुई? | देशव्यापी “हड़ताल समर्थन दिवस” 9 जुलाई को हुई। |
| क्यों विरोध? | चार नए लेबर कोड – श्रमिकों के अधिकारों में कटौती करने वाले माने जा रहे हैं। |
| क्या हुआ? | ए गेट पर गोलबंद प्रदर्शन, लेकिन कुछ संविदा मजदूर अंदर चले गए। |
| यूनियन की मांग? | नए श्रम कानूनों को वापस लेकर 44 पुरानी संहिताएँ बहाल करें। |
आगे की कार्रवाई
- यूनियन आंदोलन को आगे बढ़ा सकती है और अन्य गेटों तथा ठेकाकरण प्रणाली के खिलाफ कदम उठा सकती है।
- प्रबंधन/पुलिस – प्रभावी संवाद, सीआईएसएफ की भूमिका स्पष्ट करना, और अंदर जाने वाले मजदूरों को लेकर उचित सफाई देनी होगी।
- सरकार – श्रमिकों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना और नए लेबर कोड को फिर से विचार के लिए रखना पड़ेगा।





