तुर्की के राष्ट्रपति का तीखा हमला: “नेतन्याहू आज का हिटलर”, ईरान पर हमले को बताया तबाही का रास्ता

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BY: Yoganand Shrivastva

अंकारा से एक सनसनीखेज बयान सामने आया है जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यप एर्दोगन ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर न सिर्फ शब्दों से हमला बोला, बल्कि उन्हें सीधे तौर पर हिटलर से तुलना करते हुए “विनाश की राह पर चलने वाला पाखंडी नेता” तक कह डाला।

यह बयान उस वक्त आया है, जब ईरान और इज़रायल के बीच तनाव अपने चरम पर है और पश्चिम एशिया एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।


“नेतन्याहू वही कर रहा है जो हिटलर ने किया था” – एर्दोगन

तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा कि हिटलर और नेतन्याहू में कोई फर्क नहीं, दोनों ने विनाश, हिंसा और निर्दोषों की हत्या को ही सत्ता का औजार बनाया। उन्होंने इज़रायल की नीतियों को “नाज़ी यातना शिविरों से भी बदतर” बताते हुए कहा कि ग़ाज़ा में दो मिलियन से ज्यादा लोग अमानवीय हालात में जी रहे हैं।


ईरान को बताया ‘रक्षा में खड़ा देश’

एर्दोगन ने ईरान के समर्थन में खुलकर कहा कि, “ईरान अपनी जनता की रक्षा कर रहा है और उसे यह अधिकार है।” उन्होंने आरोप लगाया कि इज़रायल बार-बार हमले कर रहा है, जबकि खुद का परमाणु कार्यक्रम किसी भी अंतरराष्ट्रीय निगरानी के बाहर चला रहा है।


“नेतन्याहू क्षेत्रीय शांति का सबसे बड़ा दुश्मन है”

तुर्की राष्ट्रपति ने कहा कि नेतन्याहू की नीतियां मध्य पूर्व की स्थिरता को लगातार खतरे में डाल रही हैं। उनके अनुसार, 13 जून से ईरान इज़रायल द्वारा प्रायोजित राज्य आतंकवाद का शिकार है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इज़रायल की सरकार हर गुजरते दिन सैकड़ों मासूमों की जान ले रही है, और इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी भी चिंताजनक है।


परमाणु मुद्दे पर इज़रायल पर बड़ा आरोप

एर्दोगन ने इज़रायल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह दुनिया को भ्रमित कर रहा है। एक ओर वो खुद बिना किसी निगरानी के परमाणु हथियार बना रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान के शांति पूर्ण परमाणु ऊर्जा प्रयासों को दबाने की कोशिश कर रहा है।


क्या पश्चिम एशिया फिर जल उठेगा?

एर्दोगन का यह बयान केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि भविष्य में आने वाले संघर्ष का संकेत भी हो सकता है। नेतन्याहू की रणनीति और पश्चिमी समर्थन के बीच तुर्की की यह मुखर आलोचना कई देशों को सोचने पर मजबूर कर सकती है। अब देखना होगा कि इज़रायल की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है, और यह बयानबाज़ी क्षेत्रीय हालात को किस दिशा में ले जाती है।