अरुणा ईरानी की जिंदादिली की कहानी: दो बार कैंसर, किडनी फेल, फिर भी नहीं टूटी हिम्मत

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BY: Yoganand shrivastva

बॉलीवुड की जानी-पहचानी अदाकारा अरुणा ईरानी को शायद ही कोई भूल सकता है। पांच दशकों से ज्यादा के करियर में उन्होंने 500 से ज्यादा फिल्मों और कई हिट टीवी शोज़ में अपने अभिनय का लोहा मनवाया। हीरोइन से लेकर मां और वैंप के किरदार तक, अरुणा ने हर रोल में जान फूंकी। लेकिन उनके मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक गहरी और संघर्षपूर्ण कहानी छिपी है।


कैंसर से दो-दो बार लड़ाई

हाल ही में एक इंटरव्यू में अरुणा ईरानी ने खुद खुलासा किया कि उन्हें दो बार ब्रेस्ट कैंसर हो चुका है। पहली बार जब बीमारी का पता चला, वो एक शूटिंग में व्यस्त थीं। उन्होंने बताया कि शरीर में कुछ असामान्य सा महसूस हुआ, जिसके बाद उन्होंने चेकअप कराया और उन्हें ब्रेस्ट कैंसर होने की पुष्टि हुई।

डॉक्टरों ने कीमोथेरेपी की सलाह दी, लेकिन उन्होंने बाल झड़ने और चेहरा बिगड़ने के डर से इसे मना कर दिया। उस समय शूटिंग उनके लिए प्राथमिकता थी। इलाज के लिए उन्होंने सिर्फ दवाइयों का सहारा लिया।


दूसरी बार हुई गलती का एहसास

2020 में, जब पूरी दुनिया कोविड-19 से जूझ रही थी, अरुणा एक बार फिर कैंसर की चपेट में आ गईं। इस बार उन्होंने पहले की गलती को न दोहराने का फैसला किया और पूरी कीमोथेरेपी करवाई। इलाज के दौरान उन्होंने हर कठिनाई का सामना हिम्मत से किया और एक बार फिर कैंसर को हराया।

उन्होंने खुद कहा, “यह मेरी ही गलती थी कि मैंने पहले कीमोथेरेपी नहीं ली। इस बार मैंने हर बात मानी और जीत हासिल की।”


किडनी फेल, फिर भी डटी रहीं

केवल कैंसर ही नहीं, अरुणा ईरानी डायबिटीज से भी पीड़ित रहीं, जिसकी वजह से उनकी दोनों किडनियां फेल हो गईं। डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती किया, मगर किसी ऑपरेशन की नौबत नहीं आई। उचित इलाज और जीवनशैली में बदलाव के कारण वो अब पूरी तरह स्वस्थ हैं।


अब भी उतनी ही ऊर्जावान और प्रेरणादायक

अरुणा ईरानी आज भी फिल्मों और धारावाहिकों में काम कर रही हैं। करीब 80 साल की उम्र में भी उनकी ऊर्जा, मेहनत और जज्बा नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने ‘मां’, ‘फकीरा’, ‘बॉम्बे टू गोवा’, ‘रोटी’, ‘अंदाज़’, ‘बिदाई’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से लोगों का दिल जीता।


संघर्ष से सीखी जिंदगी की असली परिभाषा

अरुणा ईरानी की कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री की नहीं, बल्कि एक ऐसी महिला की है जिसने जीवन की सबसे कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। बीमारी, दर्द और असहज हालात के बावजूद उन्होंने खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया।

उनकी जिंदादिली हमें यही सिखाती है –
“अगर हिम्मत हो, तो ज़िंदगी हर जंग में जीत सकती है।”

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