रिपोर्टर – उमेश डहरिया
वन विभाग से कार्रवाई की मांग
कोरबा शहर में सड़क किनारे वर्षों से खड़े सूखे और जर्जर पेड़ अब जनसुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। ये विशालकाय पेड़, जो पहले हरियाली और छांव का प्रतीक थे, अब तेज आंधी-तूफान और बारिश के मौसम में किसी भी समय गिरकर बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
शहर के विभिन्न इलाकों में ऐसे कई सूखे पेड़ खड़े हैं, जो धीरे-धीरे खोखले हो चुके हैं और उनकी जड़ें भी कमजोर पड़ चुकी हैं। ऐसे में किसी भी प्राकृतिक आपदा या हल्के तूफान में इन पेड़ों के गिरने की आशंका बनी रहती है, जिससे सड़क से गुजरने वाले वाहन चालकों और राहगीरों की जान को खतरा हो सकता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे कई बार इस विषय में प्रशासन और वन विभाग का ध्यान आकर्षित कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों की मांग है कि वन विभाग को तुरंत ऐसे पेड़ों को चिन्हित कर कटाई करानी चाहिए, जिससे किसी भी संभावित जनहानि से बचा जा सके।
सुरक्षा की दृष्टि से यह जरूरी है कि सड़क किनारे स्थित सूखे और असुरक्षित पेड़ों की समय रहते जांच और कटाई की जाए। इसके लिए वन विभाग को एक विशेष अभियान चलाकर खतरनाक पेड़ों की सूची बनानी चाहिए और उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले दिनों में ये पेड़ किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं, जिससे न केवल जनहानि होगी बल्कि प्रशासन की लापरवाही पर भी सवाल खड़े होंगे।
जनहित में यह जरूरी है कि वन विभाग शीघ्र कार्रवाई कर कोरबा शहर को इन खतरनाक सूखे पेड़ों से सुरक्षित बनाए।





