गाज़ा एक बार फिर जंग के साये में है। इज़रायली सेना ने गाज़ा पट्टी में बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर दिया है, और इस बार संघर्ष पहले से कहीं अधिक खतरनाक होता नजर आ रहा है।
युद्धविराम के बाद हालात और बिगड़े
गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, युद्धविराम टूटने के बाद से इज़रायली हमलों में हजारों फिलीस्तीनी नागरिकों की मौत हो चुकी है। इनमें बड़ी तादाद में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, जिससे मानवीय संकट और गहरा गया है।
इजरायली सेना को बड़ा नुकसान
हमास के साथ जारी इस जंग में लंबे समय बाद इज़रायली सेना को भी बड़ा झटका लगा है। हमास ने हाल ही में गाज़ा में तीन इजरायली सैनिकों को मार गिराया, जिसकी पुष्टि खुद इज़रायली सेना ने मंगलवार को की। बताया जा रहा है कि यह हमला जबालिया इलाके में हुए एक जोरदार विस्फोट के दौरान हुआ।
यह हमला क्यों अहम है?
मार्च में युद्धविराम टूटने के बाद से यह हमास का अब तक का सबसे घातक हमला माना जा रहा है। इज़रायली सेना का कहना है कि सैनिकों की मौत उत्तरी गाज़ा में सोमवार को हुई लड़ाई के दौरान हुई। हालांकि, घटना के पूरी डिटेल साझा नहीं की गई है।
युद्धविराम क्यों टूटा?
इस बार युद्धविराम टूटने की वजह थी हमास द्वारा बंधकों की रिहाई को लेकर समझौते में बदलाव से इनकार। इज़रायल ने आरोप लगाया कि हमास लगातार युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन कर रहा था, जिसके चलते मार्च में सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू करनी पड़ी।
ये युद्ध आखिर शुरू कैसे हुआ?
गाज़ा में ये जंग 7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुई थी, जब हमास के आतंकियों ने दक्षिणी इज़रायल पर अचानक हमला कर दिया। इस हमले में करीब 1,200 इज़रायली नागरिक मारे गए और लगभग 250 लोगों को बंधक बना लिया गया।
अब तक 58 बंधक हमास की कैद में बताए जा रहे हैं, जिनमें से अनुमान है कि एक-तिहाई ही जीवित हैं। बाकी बंधकों को या तो युद्धविराम समझौतों के तहत या अन्य कूटनीतिक प्रयासों के जरिए रिहा कराया गया है।
मानवीय संकट गहराया
गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इज़रायली सैन्य अभियान में अब तक 54,000 से ज्यादा फिलीस्तीनियों की मौत हो चुकी है। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की है, जिससे यह संकट और अधिक भयावह बन गया है।
गाज़ा और इज़रायल के बीच यह संघर्ष लगातार और अधिक हिंसक होता जा रहा है। जहां एक ओर इज़रायल अपनी सुरक्षा का हवाला देकर कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों की भारी जानमाल की क्षति इस पूरे युद्ध को एक गंभीर मानवीय त्रासदी में बदल रही है।





