22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। इनमें सबसे अहम निर्णय सिंधु जल संधि को स्थगित करना रहा, जिसने पाकिस्तान को गहरे दबाव में ला दिया है। भारत की इस “वॉटर स्ट्राइक” के जवाब में अब पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सामने अपनी चिंता जाहिर कर रहा है।
आतंकी हमले के बाद भारत का जवाब
- तारीख: 22 अप्रैल
- स्थान: पहलगाम, जम्मू-कश्मीर
- घटना: पर्यटकों पर आतंकी हमला, जिसमें 26 नागरिक मारे गए
- जिम्मेदारी: द रेजिस्टेंस फ्रंट (पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा संगठन)
इस हमले के तुरंत बाद भारत ने पाकिस्तान को मिलने वाले सिंधु नदी के जल पर रोक लगाने का ऐलान किया। यह फैसला सिंधु जल संधि, जो 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी, को स्थगित करने की दिशा में एक बड़ा कदम था।
सिंधु जल संधि: पाकिस्तान के लिए क्यों है अहम?
सिंधु जल संधि के तहत:
- भारत, तीन प्रमुख नदियों (ब्यास, रावी, सतलुज) का जल उपयोग करता है
- पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों से पानी मिलता है
- भारत तकनीकी रूप से कुछ मात्रा तक पानी रोकने का अधिकार रखता है, परंतु अब संधि को पूरी तरह स्थगित करने की प्रक्रिया में है
इस फैसले ने पाकिस्तान को मुश्किल में डाल दिया है क्योंकि:
- कृषि पर गंभीर असर पड़ सकता है
- पानी की कमी से पीने और सिंचाई की समस्या
- खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय संकट का खतरा
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की अपील
भारत के इस कदम से परेशान पाकिस्तान ने अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मदद की गुहार लगाई है:
- पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सदस्यों से मुलाकात की
- प्रतिनिधियों में डेनमार्क, ग्रीस, पनामा, जापान जैसे देश शामिल रहे
- पाकिस्तान ने बताया कि यह फैसला क्षेत्रीय शांति और पर्यावरणीय संतुलन के लिए खतरा बन सकता है
ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
भारत की “वॉटर स्ट्राइक” के साथ-साथ, पाकिस्तान ने “ऑपरेशन सिंदूर” और मिसाइल हमलों पर भी चिंता जताई।
- पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया कि उनकी प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप और जिम्मेदार रही
- बिलावल भुट्टो जरदारी के नेतृत्व में यह दल अब वॉशिंगटन डीसी, लंदन और ब्रसेल्स का दौरा कर रहा है ताकि वैश्विक समुदाय को पाकिस्तान की स्थिति से अवगत करा सके
भारत की नीति में आक्रामक बदलाव
भारत का सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला केवल एक कूटनीतिक कदम नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश है कि अब आतंकी घटनाओं का जवाब केवल “बातचीत” नहीं, बल्कि व्यावहारिक एक्शन के रूप में दिया जाएगा।





