रिपोर्टर: शिखर शिवहरे
मध्य प्रदेश का पन्ना टाइगर रिजर्व एक बार फिर सुर्खियों में है — लेकिन इस बार किसी नई बाघिन के जन्म या टूरिज्म की वजह से नहीं, बल्कि एक बाघिन की रहस्यमयी मौत के चलते। बीते 15 दिनों में 4 वन्य प्राणियों की मौत ने न सिर्फ वन विभाग को सकते में डाल दिया है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
उमरझाला बीट, जो पन्ना टाइगर रिजर्व के उत्तर वन मंडल में आती है, वहां एक लगभग 10 साल की बाघिन मृत अवस्था में पाई गई। मौत की परिस्थितियाँ संदिग्ध हैं और इसका कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाया है।
- वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया।
- पोस्टमॉर्टम के बाद बाघिन का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
- प्रारंभिक रिपोर्ट में मौत का कारण बीमारी या आपसी संघर्ष बताया जा रहा है, लेकिन कोई ठोस पुष्टि नहीं हुई है।

15 दिन में 4 मौतें: खतरे की घंटी
पन्ना टाइगर रिजर्व में हाल के दिनों में लगातार हो रही मौतों ने सभी को हैरान कर दिया है:
- 15 दिन में 4 वन्यजीवों की मौत
- हर घटना में कारण अस्पष्ट
- वन विभाग के पास स्पष्ट जवाब नहीं
इससे यह सवाल उठना लाज़मी है:
क्या वन्यजीवों की सुरक्षा सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गई है?
निगरानी बढ़ी, लेकिन जवाब कौन देगा?
बाघिन की मौत के बाद उत्तर वन मंडल के अधिकारी सक्रिय हो गए हैं। पूरे इलाके में निगरानी तेज़ कर दी गई है और अन्य वन्यजीवों की स्थिति पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है।
डीएफओ गर्वित गंगवार का बयान:
“हम मामले की जांच कर रहे हैं। मौत के कारणों की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। निगरानी और सख्ती बढ़ा दी गई है।”
क्या कहती है जनता और विशेषज्ञ राय?
वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि:
- वन विभाग की मॉनिटरिंग और रिस्पॉन्स सिस्टम कमजोर है
- सीसीटीवी, ट्रैकिंग कॉलर और मेडिकल सुविधाएं पर्याप्त नहीं
- अधिकतर मामलों में मौत के कारण का पता नहीं चल पाता, जिससे सुधार की दिशा तय नहीं हो पाती
वास्तविकता से जुड़ी बातें
- पन्ना टाइगर रिजर्व कभी बाघों की संख्या में शून्य पर आ गया था, फिर यहाँ से बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम शुरू हुआ।
- आज यह रिजर्व भारत के प्रमुख टाइगर हॉटस्पॉट्स में से एक है, लेकिन लगातार हो रही वन्यजीव मौतें इस पर ग्रहण की तरह हैं।
समय रहते नहीं चेते तो…
अगर वन विभाग जल्द ही इन घटनाओं के पीछे का सच उजागर नहीं करता और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं करता, तो इससे पन्ना की अंतरराष्ट्रीय साख और पर्यटन दोनों को भारी नुकसान हो सकता है।





