मणिपुर में हुई मौतों का जिम्मेदार कौन, फिर आधी रात भड़की हिंसा, 9 लोगों की मौत

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मणिपुर रह-रह कर हिंसा की आग में जल रहा है। एक के बाद एक हिंसात्मक गतिविधियों के चलते अब तक लाखों लोग अपनी जान गवां चुके हैं। मणिपुर के मैतेई बहुल कांगपोकी जिले में मंगलवार रात हथियार बंद लोगो ने हमला किया जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई और 10 लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने बताया कि रात करीब एक बजे कांगपोकी से सटे खामेलोक गांव और इंफाल पूर्वी जिले में हमला किया गया। हमलावर अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे। मारे गए सभी लोग खामेलोक गांव के हैं।

लगातार हो रही हिंसा

मणिपुर में कुकी और मैतेई समुदाय के बीच 3 मई से हिंसा जारी है। सोमवार को भी हिंसा उग्र हो गई थी। यहां पूर्वी इंफाल जिले के सगोलमंग थाना क्षेत्र के नोंगसुम गांव में कल संदिग्ध कुकी उग्रवादियों और ग्रामीण स्वयंसेवकों के बीच गोलीबारी मे से कम 9 लोग घायल हो गए थे। खोपीबुंग गांव के गेट पर बंकर और संतरी पोस्ट स्थापित करने वाले नोंगसुम और कुकी उग्रवादियों के बड़ी संख्या में ग्राम स्वयंसेवकों के बीच भयंकर गोलीबारी हुई। नोंगसुम ममांग हिल से लगभग 12.30 बजे जी/आर से चली गोलियों से चार ग्रामीण गोली लगने से घायल हो गए।

कर्फ्यू बढ़ाया गया

हिंसा के चलते राज्य में इंटरनेट पर 15 जून तक बैन बढ़ा दिया गया है। कुछ इलाकों में कर्फ्यू में ढील भी दी गई है। हालात देखते हुए कुछ इलाको में कर्फ्यू का समय तीन घंटे के लिए बढ़ाया गया है।

हजारों हथियार बरामद

इससे पहले, मणिपुर में कई बार हिंसा हो चुकी है। जिसके बाद पुलिस ने एक अभियान चलाया । इस अभियान के तहत 1,040 हथियार बरामद किए गए हैं। इन हथियारों को उपद्रवियों ने पिछले दिनों विभिन्न स्थानों से लूट लिया था। साथ ही भारी मात्रा में गोला बारूद बरामद किया गया है।

100 से ज्यादा की मौत

मणिपुर में 3 मई के बाद से हिंसा जारी है। जसमें अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। 320 घायल हैं और 47 हजार से ज्यादा लोग 272 राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। वहीं, 10 जून को राज्य के 11 अफसरों का तबादला कर दिया गया। इनमें IAS और IPS अफसर शामिल हैं।

CBI जांच जारी

9 जून को ही CBI ने मणिपुर हिंसा के संबंध में 6 केस दर्ज किए। जांच के लिए SIT बनाई है, इसमें 10 सदस्य हैं। इसी दिन सुप्रीम कोर्ट की वेकेशनल बेंच ने राज्य में 3 मई से लगे इंटरनेट बैन पर फौरन सुनवाई से इनकार कर दिया। जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच ने कहा कि मामला पहले से हाईकोर्ट में है। याचिका एडवोकेट चोंगथम विक्टर सिंह और बिजनेसमैन मायेंगबाम जेम्स ने दायर की थी।

क्यों हो रही हिंसा ?

पिछले साल अगस्त में मुख्यमंत्री बीरेन सिंह की सरकार ने चूराचांदपुर के वनक्षेत्र में बसे नगा और कुकी जनजाति को घुसपैठिए बताते हुए वहां से निकालने के आदेश दिए थे। इससे नगा-कुकी नाराज चल रहे थे। मैतेई हिंदू धर्मावलंबी हैं, जबकि ST वर्ग के अधिकांश नगा और कुकी ईसाई धर्म को मानने वाले हैं। मणिपुर में हालिया हिंसा का कारण मैतेई आरक्षण को माना जा सकता है। नगा और कुकी जनजातियों को आशंका है कि ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों में बंटवारा होगा। मौजूदा कानून के अनुसार मैतेई समुदाय को राज्य के पहाड़ी इलाकों में बसने की इजाजत नहीं है।

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