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Odisha: पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा आज और कल, उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, जानें रथ यात्रा से जुड़ी खास बातें

ओडिशा का पुरी शहर में आज यानी रविवार (7 जुलाई) से वार्षिक रथ यात्रा की शुरूआत होने जा रही है। इसके लिए पूरा शहर तैयार है। भक्तों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। पांच दशक से ज्यादा के बाद यह यात्रा दो-दिवसीय होने वाली है। ग्रह-नक्षत्रों की गणना के अनुसार इस साल दो-दिवसीय यात्रा आयोजित की गई है, जबकि आखिरी बार 1971 में दो-दिवसीय यात्रा का आयोजन किया गया था।

परंपरा से हटकर, तीन भाई-बहन देवी-देवताओं – भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र से संबंधित त्योहार से संबंधित कुछ अनुष्ठान भी रविवार को एक ही दिन में आयोजित किए जाएंगे। रथों को जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार के सामने खड़ा किया गया है, जहां से उन्हें गुंडिचा मंदिर ले जाया जाएगा। वहां रथ एक सप्ताह तक रहेंगे।

रथ यात्रा भाग लेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

वहीं रथ यात्रा को देखते हुए ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सात और आठ जुलाई को अवकाश की घोषणा की है। जो 53 वर्षों के बाद एक विशेष अवसर है। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने बताया कि वार्षिक रथ यात्रा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भाग लेंगी।

आइए बताते हैं, रथ यात्रा के मौके पर क्या-क्या होता है?

रविवार को भक्तों द्वारा भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा खींची जाएगी। इस वर्ष, रथ यात्रा और संबंधित अनुष्ठान जैसे ‘नवयौवन दर्शन’ और ‘नेत्र उत्सव’ एक ही दिन यानी 7 जुलाई को आयोजित किए जाएंगे। ये अनुष्ठान आम तौर पर रथ यात्रा से पहले आयोजित किए जाते हैं। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, स्नान पूर्णिमा पर अधिक स्नान करने के कारण देवता अस्वस्थ हो जाते हैं और इसलिए अंदर ही रहते हैं। ‘नवयौवन दर्शन’ से पहले, पुजारी ‘नेत्र उत्सव’ नामक विशेष अनुष्ठान करते हैं, जिसमें देवताओं की आंखों की पुतलियों को नए सिरे से रंगा जाता है।

रथ यात्रा की खास बातें

पुरी की रथयात्रा आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होती है। बता दें कि रथ यात्रा के लिए भगवान श्रीकृष्ण, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र के लिए नीम की लकड़ियों से रथ तैयार किए जाते हैं। सबसे आगे बड़े भाई बलराम का रथ, बीच में बहन सुभद्रा और पीछे जगन्नाथ श्रीकृष्ण का रथ होता है। इन तीनों रथों के अलग-अलग नाम के साथ रंग होते हैं। बलराम जी के रथ को तालध्वज कहा जाता है और इसका रंग लाल और हरा होता है। देवी सुभद्रा के रथ को दर्पदलन या पद्मरथ कहा जाता है। ये काले या नीले रंग का होता है। भगवान जगन्नाथ का रथ नंदिघोष या गरुड़ध्वज के नाम से जाना जाता है जो पीले या लाल रंग का होता है। नंदिघोष की ऊंजाई 45 फीट ऊंची होती है, तालध्वज 45 फीट ऊंचा और देवी सुभद्रा का दर्पदलन पथ तकरीबन 44.7 फीट ऊंचा होता है। 

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