रिपोर्टर: सुनील कुमार ठाकुर
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत चटनीय ग्राम पंचायत का नहलूपारा गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। लगभग 60 घरों में 200 से अधिक लोग निवास करते हैं, लेकिन यहां न बिजली है, न शुद्ध पेयजल, न सड़क और न ही आंगनबाड़ी केंद्र।
बिजली और पानी की कमी
गांव में बिजली की सुविधा नहीं है, जिससे लोग रात में डिबरी की रोशनी में रहने को मजबूर हैं। पीने के लिए नदी-नाले का पानी इस्तेमाल किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
शिक्षा और पोषण की उपेक्षा
सरकार जहां एक ओर कुपोषण मिटाने और बच्चों के मानसिक विकास के लिए आंगनबाड़ी केंद्र खोलने की बात करती है, वहीं नहलूपारा में आज तक आंगनबाड़ी की शुरुआत ही नहीं हुई। बच्चों की शिक्षा और महिलाओं को पोषण देने वाला ये प्राथमिक केंद्र ही नहीं है।
प्रशासनिक उदासीनता
नहलूपारा गांव कुसमी जनपद पंचायत में आता है, जिसकी जिम्मेदारी जनपद पंचायत सीईओ अभिषेक पांडे के अधीन है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आज तक कोई अधिकारी गांव में नहीं आया। न ही सरपंच की शिकायतों पर कोई कार्रवाई हुई। सीईओ अभिषेक पांडे तक कई बार आवेदन और शिकायतें पहुँचाई गईं, लेकिन समाधान नहीं मिला।





