मुख्य बातें:
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- शिवसेना नेता संजय निरुपम ने जयपुर मस्जिद में पाकिस्तानी झंडा लगाने की घटना को “आपत्तिजनक” बताया।
- उन्होंने कहा कि भारत में रहकर पाकिस्तान के झंडे से प्यार करने वालों को यहाँ रहने का कोई अधिकार नहीं।
- नालासोपारा और सांताक्रूज में पाकिस्तानी झंडे को पैरों से कुचलने वालों का समर्थन किया।
- पहलगाम आतंकी हमले के बाद संसद सत्र बुलाने के बजाय सीधे एक्शन की वकालत की।
“पाकिस्तान का झंडा प्यार करने वाला यहाँ नहीं बस सकता!”
संजय निरुपम ने साफ शब्दों में कहा:
“अगर किसी भारतीय को पाकिस्तान के झंडे से प्यार है, तो उसे इस देश में रहने का कोई हक नहीं। चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या भाषा का हो, ऐसे लोगों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए!”
उन्होंने जयपुर की घटना (मस्जिद में पाकिस्तानी झंडा लगाना) की निंदा की, लेकिन साथ ही मुंबई के नालासोपारा और सांताक्रूज में पाकिस्तानी झंडे को जलाने और कुचलने वालों का समर्थन किया।
“संसद सत्र से ज्यादा जरूरी है पाकिस्तान को जवाब देना!”
पहलगाम हमले के बाद संसद सत्र बुलाने की मांग पर निरुपम ने कहा:
“अभी चर्चा नहीं, एक्शन चाहिए! पहले पाकिस्तान को जवाब दो, फिर संसद में बहस होगी। कारगिल के बाद भी ऐसा ही हुआ था।”
उनका कहना था कि आतंकियों को सबक सिखाने के बाद ही राजनीतिक बहस की जरूरत है।
क्यों अहम है यह बयान?
- राष्ट्रवाद vs. विवाद: निरुपम का बयान सीधे उन लोगों को टारगेट करता है जो भारत में रहकर पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति रखते हैं।
- शिवसेना की स्टैंड: यह बयान शिवसेना की “कठोर राष्ट्रवादी” छवि को मजबूत करता है।
- सियासी मौका: पहलगाम हमले के बाद सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास।
क्या होगा असर?
- सोशल मीडिया पर बहस: निरुपम के बयान को लेकर ट्विटर पर #SanjayNirupam और #PakistanFlag ट्रेंड कर रहा है।
- विपक्ष की प्रतिक्रिया: कांग्रेस और अन्य दल इसे “भड़काऊ” बयान बता सकते हैं।
- सरकार पर दबाव: सेना को खुली छूट के बाद अब राजनीतिक बहस तेज होगी।
फैसला आपका:
- क्या आपको लगता है कि पाकिस्तानी झंडे का अपमान करना सही है?
- या फिर यह केवल विवाद बढ़ाने वाली राजनीति है?
कमेंट में बताइए!
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