हाईकोर्ट पहुंचा मामला
भोपाल। लोकसभा और राज्यसभा की तरह मध्यप्रदेश विधानसभा की कार्यवाही को लाइव स्ट्रीमिंग करने की मांग तेज हो गई है। कांग्रेस इस मुद्दे को लंबे समय से उठा रही थी और अब इस मामले को लेकर इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। खास बात यह है कि बीजेपी के कुछ विधायक भी इस मांग का समर्थन कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस का कहना है कि विधानसभा में विधायक जनता के मुद्दों पर क्या चर्चा कर रहे हैं, कौन-कौन से विषय उठाए जा रहे हैं, यह जनता को सीधे देखने का अधिकार होना चाहिए। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही लाइव होती है, लेकिन मध्यप्रदेश विधानसभा में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इसीलिए कांग्रेस ने इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ में याचिका दायर की है।
बीजेपी विधायकों का भी समर्थन
आश्चर्यजनक रूप से बीजेपी के कुछ विधायक भी इस मांग के समर्थन में आ गए हैं। उनका कहना है कि जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि विधानसभा में क्या कर रहे हैं।
बीजेपी के एक विधायक ने कहा:
“अगर लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही लाइव हो सकती है, तो विधानसभा की क्यों नहीं? जनता को पता चलना चाहिए कि उनके नेता विधानसभा में क्या बहस कर रहे हैं और किन मुद्दों को उठा रहे हैं।”
कांग्रेस का तर्क
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अक्सर विधानसभा की कार्यवाही में महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होती है, लेकिन जनता को इसकी पूरी जानकारी नहीं मिल पाती। अगर कार्यवाही लाइव होगी, तो जनता अपने जनप्रतिनिधियों का कामकाज बेहतर तरीके से परख सकेगी।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा:
“विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है, इसे जनता से छिपाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। अगर कोई विधायक सही से अपनी भूमिका नहीं निभा रहा है या गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार कर रहा है, तो जनता को इसका पता चलना चाहिए।”
हाईकोर्ट में क्या होगा फैसला?
अब यह मामला हाईकोर्ट में पहुंच चुका है। अगर कोर्ट कांग्रेस की याचिका को स्वीकार करता है, तो विधानसभा की कार्यवाही को लाइव करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला विधानसभा अध्यक्ष और राज्य सरकार को लेना होगा।
क्या बदलाव आ सकते हैं?
अगर हाईकोर्ट इस मांग के पक्ष में फैसला देता है, तो:
विधानसभा की कार्यवाही टीवी चैनलों और यूट्यूब पर लाइव हो सकती है।
जनता अपने विधायकों के कामकाज को सीधे देख सकेगी।
विधानसभा की पारदर्शिता बढ़ेगी और गैर-जिम्मेदार विधायकों पर दबाव बनेगा।





