दंतेवाड़ा। बैलाडीला की एनएमडीसी लौह अयस्क खदानों में 1968 से उत्पादन शुरू हुआ था। उस दौर में विषम परिस्थितियों के बावजूद, अलग-अलग राज्यों से आए मजदूरों और कर्मचारियों ने इस क्षेत्र को एक उद्योगिक स्वर्ग में बदल दिया। उन्होंने जो खून-पसीना बहाया, उसका लाभ आज की पीढ़ी को मिल रहा है।
उनके इसी योगदान को याद करते हुए, एनएमडीसी सेवानिवृत्त इम्प्लाइज कल्याण समिति ने इस वर्ष भी वार्षिक मिलन समारोह का आयोजन किया। यह आयोजन उन कर्मचारियों के सम्मान में था, जिन्होंने एनएमडीसी को खड़ा करने में अपनी जिंदगी समर्पित कर दी।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों का सम्मान
इस अवसर पर एनएमडीसी किरंदुल परियोजना से सेवानिवृत्त होकर 75 वर्ष पूर्ण कर चुके वरिष्ठ सदस्यों को शाल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। समारोह में पुराने साथियों ने 1968 के समय की यादें साझा कीं और कुछ क्षणों के लिए अपने संघर्षपूर्ण दिनों को फिर से जिया।
भावुक हुआ समारोह, धर्म पत्नियों को भी मिला सम्मान
समारोह का माहौल उस समय भावुक हो गया, जब एनएमडीसी किरंदुल परियोजना से सेवानिवृत्त होकर देवलोक सिधार चुके कर्मचारियों की धर्म पत्नियों को भी शाल और श्रीफल से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके त्याग और संघर्ष को स्वीकार करने का प्रतीक था, जिन्होंने अपने जीवनसाथी के साथ कठिन परिस्थितियों में इस परियोजना को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।
मुख्य अतिथियों ने साझा की भावनाएं
इस अवसर पर एनएमडीसी किरंदुल परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक संजीव साही, एनएमडीसी किरंदुल परियोजना की श्रमिक संघ (इंटक) के सचिव ए.के. सिंह, और एनएमडीसी बचेली परियोजना के श्रमिक संघ (इंटक) के सचिव आशीष यादव ने भी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संबोधित किया।
मुख्य महाप्रबंधक संजीव साही ने कहा:
“एनएमडीसी आज जिस मुकाम पर है, वह हमारे सेवानिवृत्त कर्मचारियों की मेहनत का ही परिणाम है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में दिन-रात मेहनत कर इस परियोजना को सफलता दिलाई। उनका योगदान हमेशा अमूल्य रहेगा।”
पुराने साथियों से मिलकर छलक पड़े आंसू
यह एक ऐसा अवसर था, जब पुराने साथी गले मिलकर मिले और पुरानी यादों को ताजा किया। कुछ बुजुर्गों की आंखों में खुशी और भावनाओं के आंसू छलक पड़े। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि समर्पण और संघर्ष कभी भुलाए नहीं जा सकते, और जो लोग किसी संस्थान के निर्माण में अपनी पूरी जिंदगी लगा देते हैं, उनका सम्मान हमेशा किया जाना चाहिए।





