EPFO New Rules : EPFO का बड़ा फैसला: ₹1 लाख की सैलरी पर भी अनिवार्य रूप से कटेंगे सिर्फ ₹1,800, जानें पीएफ के नए नियम

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EPFO New Rules

EPFO New Rules देश के निजी क्षेत्र (Private Sector) में काम करने वाले करीब 8 करोड़ कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब पीएफ खाते में अनिवार्य योगदान की सीमा को सीमित कर दिया गया है। इसके मुताबिक, अब कर्मचारियों की बेसिक सैलरी चाहे कितनी भी हो, अनिवार्य रूप से केवल 15,000 रुपये की तय वैधानिक सैलरी सीमा पर ही 12% का पीएफ योगदान देना होगा, जो प्रति माह 1,800 रुपये बनता है।

EPFO के ये नए नियम 29 जून से प्रभावी हो गए हैं और इन्हें नए लेबर कोड (New Labor Code) के अनुरूप तैयार किया गया है।

EPFO New Rules ₹1 लाख की बेसिक सैलरी पर कैसे काम करेगा नया नियम?

EPFO New Rules नए नियमों के लागू होने के बाद अब ईपीएफ (EPF) योगदान में लचीलापन (Flexibility) आ गया है:

  • अनिवार्य कटौती: यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 1 लाख रुपये प्रति माह भी है, तो उसके वेतन से अनिवार्य रूप से सिर्फ 1,800 रुपये ही पीएफ के रूप में कटेंगे और नियोक्ता (कंपनी) भी अपनी तरफ से केवल 1,800 रुपये का ही अनिवार्य योगदान मिलाएगी।
  • स्वैच्छिक योगदान (Voluntary Contribution): 1,800 रुपये की इस अनिवार्य सीमा से ऊपर यदि कोई कर्मचारी अपने पीएफ खाते में अधिक पैसा जमा करना चाहता है, तो वह अपनी मर्जी से ऐसा कर सकता है। इसे स्वैच्छिक बचत माना जाएगा और इस पर सदस्यों को अपनी रिटायरमेंट बचत तय करने का ज्यादा अधिकार मिलेगा।

सैलरी री-स्ट्रक्चरिंग का फायदा: निजी क्षेत्र में अधिकांश नौकरियां कॉस्ट-टू-कंपनी (CTC) मॉडल पर आधारित होती हैं। इस नए नियम के बाद कंपनियां और कर्मचारी मिलकर टेक-होम सैलरी (In-Hand Salary) को बढ़ाने के लिए अपने वेतन ढांचे को दोबारा व्यवस्थित (Re-structure) कर सकेंगे।

EPFO New Rules पहले क्या थे नियम?

पुरानी ईपीएफ योजना (1952) के तहत, 15,000 रुपये की सैलरी लिमिट केवल नौकरी की शुरुआत में यह तय करने के लिए थी कि कर्मचारी को सोशल सिक्योरिटी कवर मिलेगा या नहीं। एक बार योजना से जुड़ने के बाद, कर्मचारी और कंपनी दोनों को वास्तविक बेसिक सैलरी (चाहे वह 15,000 से कितनी भी ज्यादा हो) पर पूरा 12% योगदान देना पड़ता था। इसके अलावा, साल 2014 के नियमों के तहत कंपनी द्वारा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में दिया जाने वाला 8.33% का हिस्सा अधिकतम 1,250 रुपये (15,000 का 8.33%) पर सीमित था, और बाकी बची अतिरिक्त राशि सीधे कर्मचारी के पीएफ खाते में चली जाती थी।

EPFO New Rules पीएफ से पैसा निकालना हुआ बेहद आसान: 13 की जगह सिर्फ 3 कैटेगरी

नियमों को सरल बनाते हुए EPFO ने पीएफ खाते से एडवांस या आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) की जटिल प्रक्रिया को भी बेहद आसान कर दिया है। पहले जहां पैसा निकालने के लिए 13 अलग-अलग वजहें (Categories) बतानी पड़ती थीं, अब उन्हें घटाकर सिर्फ 3 मुख्य श्रेणियों में समेट दिया गया है:

  1. जरूरी काम: बीमारी के इलाज, उच्च शिक्षा या शादी के लिए।
  2. घर: नया मकान खरीदने या निर्माण कार्य कराने के लिए।
  3. विशेष हालात: विशेष परिस्थितियों में सदस्य अपने पीएफ खाते से 100% तक एलिजिबल बैलेंस निकाल सकते हैं, जिसमें कर्मचारी और कंपनी दोनों का हिस्सा शामिल होगा।

बैलेंस का नियम: ध्यान रहे कि इस सुगम निकासी व्यवस्था के बावजूद, किसी भी आपातकालीन स्थिति में निकासी के बाद भी कर्मचारी के पीएफ खाते में कम से कम 25% बैलेंस बचा रहना अनिवार्य होगा।

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