Jal Ganga Sanvardhan Abhiyan : मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान, जल संरक्षण का बना जनआंदोलन, जल संरक्षण के संस्कार को संजोता ‘मध्यप्रदेश’, हर बूंद का सम्मान, जल समृद्धि की पहचान
Jal Ganga Sanvardhan Abhiyan : मध्यप्रदेश में 19 मार्च से शुरू हुआ जल गंगा संवर्धन अभियान आज प्रदेशभर में आयोजित समापन कार्यक्रमों के साथ एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गया। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान का अंत नहीं, बल्कि जल संरक्षण को जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की नई शुरुआत है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित इस अभियान के तहत प्रदेश के 55 जिलों में जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए गए। अभियान के दौरान तालाबों, बावड़ियों, कुओं, अमृत सरोवरों, चेकडैम, वर्षा जल संचयन, नदी पुनर्जीवन और भू-जल संवर्धन सहित करीब 3.62 लाख कार्य किए गए, जिन पर लगभग 10 हजार 514 करोड़ रुपये की लागत से परियोजनाएं क्रियान्वित की गईं। समापन अवसर पर प्रदेश की ग्राम पंचायतों और जिलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें अभियान की उपलब्धियों की प्रदर्शनी, जल संरक्षण पर जनजागरूकता, जनभागीदारी से हुए कार्यों का प्रस्तुतीकरण, उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं का सम्मान तथा जल संरक्षण की शपथ दिलाई जा रही है। सरकार का मानना है कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व है। इसी उद्देश्य से अभियान को जनभागीदारी से जोड़ते हुए इसे स्थायी जनआंदोलन का स्वरूप दिया गया है। आगामी मानसून में जल संरचनाओं के संरक्षण, वर्षा जल संचयन और पौधरोपण जैसे कार्यक्रमों को भी इसी अभियान की निरंतरता के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। जल गंगा संवर्धन अभियान का समापन आज भले हो रहा हो, लेकिन जल संरक्षण का संकल्प निरंतर जारी रहेगा। जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 का समापन एक पड़ाव है, विराम नहीं। यह जनभागीदारी से जल संरक्षण की संस्कृति को स्थायी जनआंदोलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अभियान भले ही समाप्त हो रहा हो, लेकिन जल स्रोतों के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन का संकल्प निरंतर जारी रहेगा।

मध्यप्रदेश में 19 मार्च से 30 जून 2026 तक चले जल गंगा संवर्धन अभियान के दौरान जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और जनभागीदारी पर विशेष फोकस किया गया। अभियान के तहत राज्यभर में बड़े पैमाने पर जल संरचनाओं का निर्माण, जीर्णोद्धार और संरक्षण कार्य किए गए। यह अभियान केवल जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने और वर्षा जल के अधिकतम संचयन, भू-जल स्तर सुधार तथा भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक व्यापक पहल के रूप में संचालित किया गया। आज राजगढ़ जिले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 350 करोड़ से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करेंगे।इस अवसर पर वे जल संरक्षण एवं संवर्धन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले जलप्रहरियों का सम्मान भी करेंगे।
Jal Ganga Sanvardhan Abhiyan : अभियान की प्रमुख उपलब्धियां
जल गंगा संवर्धन अभियान जल-सुरक्षित और समृद्ध मध्यप्रदेश की नींव बना। अभियान के तहत प्रदेशभर में करीब 3.62 लाख जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्य किए गए। इन कार्यों पर लगभग 10,514 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न परियोजनाओं का क्रियान्वयन हुआ। तालाबों, कुओं, बावड़ियों और अमृत सरोवरों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार किया गया। चेकडैम, स्टॉप डैम और वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण कर जल संग्रहण क्षमता बढ़ाई गई। नदी पुनर्जीवन (River Rejuvenation) और जल स्रोतों की सफाई के कार्य किए गए। भू-जल संवर्धन के लिए रिचार्ज संरचनाएं विकसित की गईं। जल गुणवत्ता सुधार से जुड़े कार्यों को भी अभियान में शामिल किया गया। मनरेगा सहित विभिन्न योजनाओं के अभिसरण से जल संरक्षण परियोजनाओं को गति दी गई। जनभागीदारी, श्रमदान, महिला स्व-सहायता समूहों, युवा समूहों, किसानों, विद्यालयों और स्वयंसेवी संस्थाओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की गई। अभियान के समापन पर उत्कृष्ट ग्राम पंचायतों, विभागों, जलदूतों, स्वयंसेवी संस्थाओं और जल संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले नागरिकों को सम्मानित करने का निर्णय लिया गया।
Jal Ganga Sanvardhan Abhiyan : जल संरक्षण के संस्कार को संजोता ‘मध्यप्रदेश’
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के माध्यम से मध्यप्रदेश जल संरक्षण के संस्कार को संजोता हुआ आगे बढ़ रहा है। जल बचाने का जनअभियान, भविष्य को सुरक्षित बनाता मध्यप्रदेश। परंपरा और तकनीक के संग, जल संरक्षण में अग्रणी मध्यप्रदेश। हर बूंद का सम्मान, जल समृद्धि की पहचान – मध्यप्रदेश। जल गंगा संवर्धन अभियान से सशक्त हो रहा मध्यप्रदेश। तालाब, बावड़ी और नदियों के पुनर्जीवन का संकल्प निभाता मध्यप्रदेश। जल संरक्षण को जनभागीदारी का उत्सव बनाता मध्यप्रदेश। बूंद-बूंद बचाकर समृद्धि की नई इबारत लिखता मध्यप्रदेश। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश देता मध्यप्रदेश। जल है तो कल है, इस संकल्प को साकार करता मध्यप्रदेश। संस्कार, सहभागिता और संरक्षण का मॉडल बनता मध्यप्रदेश।

