Jamshedpur: जयंती सरोवर में मछलियों की मौत से हड़कंप, गहराता जल प्रदूषण का संकट

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Jamshedpur

Report: Prem Shrivastva

Jamshedpur : लौहनगरी के हृदय स्थल कहे जाने वाले जुबली पार्क स्थित जयंती सरोवर में पिछले एक सप्ताह से जलीय जीवन पर भारी संकट मंडरा रहा है। सरोवर में बड़ी संख्या में मछलियों के मरने का सिलसिला थम नहीं रहा है, जिससे न केवल जलीय पारिस्थितिकी तंत्र बल्कि आसपास के पर्यावरण पर भी खतरा बढ़ गया है। पिछले तीन दिनों में स्थिति और भी भयावह हो गई है, जहाँ पानी की सतह पर मृत मछलियों की परत देखी जा रही है।

Jamshedpur ऑक्सीजन की कमी और संक्रमण की आशंका

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मरने वाली मछलियों में ‘तिलपिया’ प्रजाति की संख्या सर्वाधिक है, हालांकि रोहू और मृगल जैसी प्रजातियां भी इसकी चपेट में हैं। स्थानीय जानकारों का मानना है कि सरोवर के पानी में ऑक्सीजन का स्तर खतरनाक रूप से गिर गया है, जिससे मछलियों का दम घुट रहा है। वहीं, कुछ विशेषज्ञ इसे किसी अज्ञात संक्रमण या जल जनित बीमारी से जोड़कर भी देख रहे हैं। वर्तमान में टाटा स्टील प्रबंधन द्वारा नावों के जरिए मृत मछलियों को निकालने और उन्हें दफनाने का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है ताकि संक्रमण और दुर्गंध को फैलने से रोका जा सके।

Jamshedpur प्रदूषित नालों का प्रवेश बना बड़ी चुनौती

सरोवर के दूषित होने के पीछे शहर और औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले गंदे नालों को मुख्य कारण बताया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सोनारी क्षेत्र की गंदगी और टाटा स्टील के औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े नालों का अनियंत्रित बहाव सीधे जयंती सरोवर में मिल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जहाँ ये नाले सरोवर में गिरते हैं, वहां मछलियों की मृत्यु दर सबसे अधिक देखी गई है। बार-बार शिकायत के बावजूद इन नालों के डायवर्जन या ट्रीटमेंट के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

Jamshedpur प्रशासनिक तंत्र की चुप्पी और जनता में आक्रोश

इस गंभीर पर्यावरणीय मुद्दे पर झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मत्स्य विभाग की अनुपस्थिति ने स्थानीय लोगों को आक्रोशित कर दिया है। अब तक न तो सरोवर के पानी का कोई वैज्ञानिक परीक्षण किया गया है और न ही मछलियों का पोस्टमार्टम कराया गया है। नागरिकों ने नए उपायुक्त से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए दोषी निकायों पर कार्रवाई की अपील की है। हाल ही में स्वर्णरेखा नदी में हुई इसी तरह की घटना को देखते हुए शहर की जल निकायों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

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