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Swadesh News > धर्म-संस्कृति > Kedarnath Shivling : देश के 11 ज्‍योत‍िर्लिंगों से अलग हैं बाबा केदारनाथ का स्वरूप, जानिए त्रिकोणीय श‍िवल‍िंग का रहस्‍य
धर्म-संस्कृति

Kedarnath Shivling : देश के 11 ज्‍योत‍िर्लिंगों से अलग हैं बाबा केदारनाथ का स्वरूप, जानिए त्रिकोणीय श‍िवल‍िंग का रहस्‍य

Abhishek Singh
Last updated: April 22, 2026 4:47 pm
By Abhishek Singh
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4 Min Read
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Kedarnath Shivling: केदारनाथ धाम का शिवलिंग अपने त्रिकोणीय स्वरूप अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग माना जाता है। धार्मिक आस्था का केंद्र केदारनाथ के पीछे छिपा इतिहास और पौराणिक कथाएं इसे और भी रहस्यमयी बनाती हैं। जाने क्या है केदारनाथ शिवलिंग का रहस्यमयी इतिहास

Kedarnath Shivling : चार धाम यात्रा की शुरुआत के साथ ही केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। हिमालय की ऊंची चोटियों में स्थित यह पवित्र धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। हर साल लाखों भक्त यहां पहुंचते हैं और इस दिव्य स्थल की आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं। केदारनाथ धाम आस्था के साथ-साथ यहां स्थापित शिवलिंग अपने त्रिभुज के आकार और रहस्यमयी उत्पत्ति के कारण भी खास माना जाता है। तो चलिए जानते हैं क्या है त्रिकोणीय श‍िवल‍िंग का रहस्‍य।

Contents
Kedarnath Shivling: केदारनाथ धाम का शिवलिंग अपने त्रिकोणीय स्वरूप अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग माना जाता है। धार्मिक आस्था का केंद्र केदारनाथ के पीछे छिपा इतिहास और पौराणिक कथाएं इसे और भी रहस्यमयी बनाती हैं। जाने क्या है केदारनाथ शिवलिंग का रहस्यमयी इतिहासKedarnath Shivling : केदारनाथ धाम का पवित्र महत्वKedarnath Shivling : 6 महीने बंद, 6 महीने खुला रहता है धामKedarnath Shivling : त्रिकोणीय शिवलिंग का रहस्यKedarnath Shivling : केदारनाथ से जुड़ी पौराणिक कथाKedarnath Shivling : पंचकेदार की मान्यता
Kedarnath Shivling

Kedarnath Shivling : केदारनाथ धाम का पवित्र महत्व

केदारनाथ मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रमुख ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह स्थान समुद्र तल से बहुत ऊंचाई पर स्थित है, जिसके कारण इसे सबसे ऊंचा ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है। यहां साल में लगभग 6 महीने बर्फबारी के कारण यात्रा बंद रहती है, जबकि गर्मियों में श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू होते हैं।

Kedarnath Shivling : 6 महीने बंद, 6 महीने खुला रहता है धाम

सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण केदारनाथ मंदिर तक पहुंचना संभव नहीं होता। इसी कारण हर साल कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान भगवान केदारनाथ की चल विग्रह डोली को उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में लाया जाता है, जहां पूरे सर्दी काल में उनकी पूजा होती है। मौसम सामान्य होते ही बाबा केदार अपने धाम लौट आते हैं।

Kedarnath Shivling : त्रिकोणीय शिवलिंग का रहस्य

केदारनाथ का शिवलिंग अपने अनोखे त्रिकोणीय आकार के लिए प्रसिद्ध है, जो अन्य ज्योतिर्लिंगों से इसे अलग बनाता है। यह सामान्य गोलाकार नहीं है, बल्कि एक विशेष रूप में स्थापित माना जाता है। इसकी ऊंचाई और चौड़ाई लगभग समान मानी जाती है। मंदिर परिसर में माता पार्वती और पांडवों की आकृतियां भी इसकी पौराणिकता को और मजबूत करती हैं।

Kedarnath Shivling : केदारनाथ से जुड़ी पौराणिक कथा

मान्यता के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति और भगवान शिव के दर्शन के लिए हिमालय की ओर निकल पड़े। लेकिन भगवान शिव उनसे नाराज थे और वे उनसे मिलना नहीं चाहते थे। इसलिए उन्होंने स्वयं को एक बैल (नंदी रूप) में बदल लिया और अन्य पशुओं के साथ छिप गए। जब पांडवों ने उन्हें पहचानने की कोशिश की, तो भीम ने विशाल रूप धारण कर उन्हें पकड़ने का प्रयास किया। उसी समय बैल रूप में भगवान शिव पृथ्वी में समाने लगे। भीम ने उन्हें पकड़ने के लिए उनकी पीठ का हिस्सा पकड़ लिया, लेकिन शिवजी जमीन में समा गए। इसी संघर्ष में बैल का पीठ वाला हिस्सा केदारनाथ में रह गया, जो आज त्रिकोणीय शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है। यह शिव के कूबड़ का स्वरूप माना जाता है और इसे अत्यंत पवित्र माना गया है।

Kedarnath Shivling : पंचकेदार की मान्यता

भगवान शिव के शरीर के अलग-अलग हिस्से विभिन्न स्थानों पर प्रकट हुए, जिन्हें पंचकेदार कहते हैं। उनके बाहु (भुजाएं) तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मदमहेश्वर में और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुई। कुछ मान्यताओं के अनुसार, शिव जी का सिर नेपाल के काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में प्रकट हुआ था। वहीं कुछ मान्यता के अनुसार डोलेश्वर महादेव मंदिर को भी उनके सिर का स्थान माना जाता है।

read more : Bastar Development : बीजापुर में विकास को मिलेगी नई रफ्तार, ‘बस्तर मुन्ने’ और ‘नियद-नेल्लानार 2.0’ योजनाओं का शुभारंभ

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