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jaggi-murder case : जग्गी हत्याकांड में बड़ा फैसला, अमित जोगी को उम्रकैद, 20 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

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jaggi-murder case : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में करीब 23 साल बाद बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी के बेटे अमित जोगी को हाईकोर्ट ने दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जब सभी आरोपियों के खिलाफ समान प्रकृति के साक्ष्य मौजूद हों, तो किसी एक आरोपी के साथ अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।

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jaggi-murder case : मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद वर्मा की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सभी आरोपियों पर एक जैसे आरोप और सबूत हों, तो बिना ठोस कारण किसी एक को बरी करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। अदालत ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (षड्यंत्र) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 1000 रुपये के जुर्माने की सजा दी है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी। साथ ही, उन्हें तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए गए हैं।

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jaggi-murder case : इस फैसले के खिलाफ अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की गई है। प्रारंभिक सुनवाई में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष पक्ष रखा गया। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी कि हाईकोर्ट के निर्णय में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पूर्ण पालन नहीं हुआ।

jaggi-murder case : आपको बता दें कि यह मामला 4 जून 2003 का है, जब रायपुर में एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। प्रारंभिक जांच को लेकर विवाद के बाद यह मामला सीबीआई (Central Bureau of Investigation) को सौंपा गया था। जांच में कई लोगों के खिलाफ हत्या और साजिश के आरोप तय किए गए थे।

इस केस में कुल 31 आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से अधिकांश को पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है। वर्ष 2007 में निचली अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था, लेकिन इस फैसले को चुनौती दी गई, जिसके बाद मामला दोबारा उच्च न्यायालय पहुंचा और अब नया निर्णय सामने आया है। यह फैसला लंबे समय से लंबित इस मामले में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, जबकि अंतिम स्थिति अब सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।

jaggi-murder case : रामावतार जग्गी के बारे में जानिए

कारोबारी रामावतार जग्गी देश के बड़े नेताओं में गिने जाते थे। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे। जब विद्याचरण कांग्रेस छोड़कर एनसीपी में चले गये, तो जग्गी भी उनके साथ गए। इसके बाद शुक्ल ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में एनसीपी का कोषाध्यक्ष बनाया था।

jaggi-murder case : इन आरोपियों को ठहराया गया था दोषी

जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत, विश्वनाथ राजभर दोषी ठहराये गये थे।

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