रिपोर्ट – प्रेम श्रीवास्तव
Jamshedpur बहरागोड़ा थाना क्षेत्र के पानीपाड़ा स्थित स्वर्णरेखा नदी के किनारे एक अत्यंत शक्तिशाली और संदिग्ध बम मिलने से हड़कंप मच गया है। लगभग 227 किलोग्राम वजन के इस बम के बारे में माना जा रहा है कि यह द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के समय का है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना की विशेषज्ञ टीम ने सुरक्षा की कमान अपने हाथ में ले ली है।

Jamshedpur सेना के विशेषज्ञों की देखरेख में ‘ऑपरेशन डिफ्यूज’
बम की सूचना मिलते ही प्रशासन ने सेना से संपर्क किया। इसके बाद लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह और कैप्टन आयुष कुमार सिंह के नेतृत्व में सेना की एक विशेष टीम मौके पर पहुँची। टीम ने बम की मारक क्षमता, उसकी वर्तमान स्थिति और आसपास के भौगोलिक क्षेत्र का बारीकी से अध्ययन किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी अधिक मात्रा में विस्फोटक होने के कारण इसे निष्क्रिय करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।

Jamshedpur सुरक्षा के कड़े इंतजाम: रेत की दीवार और गहरे गड्ढे का कवच
विस्फोट की स्थिति में होने वाले संभावित नुकसान को शून्य करने के लिए सेना वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग कर रही है:

- सैंडबैग वॉल: बम के चारों ओर रेत से भरी बोरियों की एक मजबूत और ऊंची दीवार खड़ी की गई है ताकि छर्रों और शॉकवेव को रोका जा सके।
- कंट्रोल्ड ब्लास्ट: एक विशेष गहरा गड्ढा खोदा गया है, जिससे विस्फोट का दबाव हवा में फैलने के बजाय जमीन के अंदर ही अवशोषित हो जाए।
- रेड जोन: सुरक्षा के लिहाज से घटनास्थल के 1 किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह सील कर दिया गया है।
Jamshedpur इलाके में अलर्ट, प्रशासन की अपील
बहरागोड़ा थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक बम को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय नहीं कर दिया जाता, तब तक आम नागरिकों का इस क्षेत्र में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और सुरक्षा घेरे से दूर रहें।
प्रमुख जानकारी एक नज़र में:
| विवरण | तथ्य |
| स्थान | पानीपाड़ा, स्वर्णरेखा नदी तट (बहरागोड़ा) |
| वजन | लगभग 227 किलोग्राम |
| संभावित काल | द्वितीय विश्व युद्ध (WWII) |
| नेतृत्व | लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह, कैप्टन आयुष कुमार सिंह |
| सुरक्षा घेरा | 1 किलोमीटर का प्रतिबंधित क्षेत्र |





