सुर्खियों में सोना, काली कमाई का सफेद सच,भोपाल में मिले सोने व कैश की असली कहानी

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भोपाल: मध्यप्रदेश के भोपाल में इनकम टैक्स विभाग ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। आयकर विभाग की टीमों ने करीब 3 बड़े बिल्डरों और उनके नजदीक संबंध रखने वालों के 52 ठिकानों पर छापा मारा है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई राजधानी भोपाल में 49 और इंदौर में दो और ग्वालियर में एक जगह पर की गई है। ग्वालियर में रामवीर सिंह सिकरवार के आवास पर कार्रवाई हुई है। वह प्रापर्टी डीलिंग का काम करते हैं। कुछ दिन पहले उनके यहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रेड भी पड़ी थी। भोपाल के त्रिशूल बिल्डर के राजेश शर्मा के घर और अन्य स्थानो…

मध्यप्रदेश के भोपाल में इनकम टैक्स विभाग ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। आयकर विभाग की टीमों ने करीब 3 बड़े बिल्डरों और उनके नजदीक संबंध रखने वालों के 52 ठिकानों पर छापा मारा है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई राजधानी भोपाल में 49 और इंदौर में दो और ग्वालियर में एक जगह पर की गई है। ग्वालियर में रामवीर सिंह सिकरवार के आवास पर कार्रवाई हुई है। वह प्रापर्टी डीलिंग का काम करते हैं। कुछ दिन पहले उनके यहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रेड भी पड़ी थी। भोपाल के त्रिशूल बिल्डर के राजेश शर्मा के घर और अन्य स्थानों पर छापा डाला गया है। जिन बिल्डरों के यहां छापा पड़ा है उनमें त्रिशूल के अतिरिक्त, क्वॉलिटी और ईशान बिल्डर शामिल हैं। साथ ही इनसे जुड़े जमीन की खरीदी बिक्री का कारोबार और होटल व्यवसाय के कारोबार में लगे लोगों के यहां भी तलाशी अभियान चलाया गया। राजेश शर्मा का क्रशर का व्यवसाय भी है। साथ ही क्रशर संचालकों के संगठन के अध्यक्ष भी हैं। भोपाल में जब ये कार्रवाईयां चल रही थी इसी दौरान राजधानी के एक फॉर्म हाउस में एक कार से 52 किलो सोना और करोड़ों रूपये कैश मिलता है। कार में मिला ये सोना व कैश आज देशभर की सुर्खियां बना हुआ है। सोना किसका है, कहां से आया। बहुत सारे सवाल ऐसे हैं जिसकी तफ्तीश अभी जांच एजेंसियां कर रही हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो तार जोड़े जा रहे हैं। और जिससे जोड़े जा रहे हैं। उसमें कितन सच्चाई है। या इसके पीछे की कहानी ही कुछ और है। पुलिस और जांच एजेंसियां कार्रवाई में जुटी हुई हैं। ईडी भी कार्रवाई कर रही है। इस मामले में रोजाना नए खुलासे भी हो रहे हैं। लेकिन कई राज अभी ऐसे हैं जिनकी जांच होना बाकी है। क्योंकि जांच एजेंसियों की कार्रवाई में कई गुत्थियां ऐसी हैं जो सुलझ नहीं पाई हैं।।।

कई एंगल से तफ्तीश कर रही हैं जांच एजेंसियों

मध्यप्रदेश का राजधानी भोपाल बीते कुछ दिनों से काले धन के मामले में आयकर और लोकायुक्त की हुई कार्रवाई को लेकर सुर्खियों में है। बीते कुछ दिनों में दोनों ही एजेंसियों ने कई बिल्डर्स व अन्य कारोबारियों पर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इसी क्रम में बीते 15 दिनों में आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रमुख बिल्डर और त्रिशूल कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक राजेश शर्मा के ठिकानों पर आयकर विभाग ने छापेमारी की है। इसके साथ ही, रूपम सेवानी सहित अन्य कारोबारियों के ठिकानों पर भी विभाग ने कार्रवाई की है। इनके कार्यालयों और आवास पर आयकर विभाग ने छापा मारा। सामने आया कि इन कारोबारी के कई नौकरशाहों से संबंध हैं। बता दें कि छापेमारी भोपाल के सूरजपुर, मेंडोरा और अन्य स्थानों पर की गई थी। आयकर विभाग की अलग-अलग टीमें कुल 8-10 स्थानों पर छानबीन की। सभी कारोबारियों और बिल्डर का नाम भोपाल के बड़े प्रोजेक्ट सेंट्रल पार्क से जुड़ा हुआ भी बताया गया है। बिल्डरों पर हुई कार्रवाई के दौरान इस पूरे मामले में परिवहन के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा का नाम प्रमुखता से आ रहा है। लेकिन सवाल यही है कि बीते दिनों आयकर और लोकायुक्त की जो इतनी बड़ी बड़ी कार्रवाईयां हुई हैं। क्या कार में बरामद सोने और केस के तार सौरभ शर्मा से जुड़े हुए हैं।

त्रिशूल कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई

• राजेश शर्मा त्रिशूल कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक हैं
• वे भोपाल में क्रेशर संचालकों के संगठन का नेतृत्व भी कर चुके हैं
• उनका व्यवसाय राजधानी भोपाल और उसके आसपास के क्षेत्रों में फैला हुआ है
• जहां वे खदानों के ठेके और क्रेशर संचालन का कार्य करते हैं
• इसके अलावा, वे बिल्डर भी हैं, जो उनकी व्यावसायिक गतिविधियों का एक अहम हिस्सा है
कई कारोबारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई
• आयकर विभाग की टीम ने राजेश शर्मा के साथ-साथ विनोद अग्रवाल
• दीपक भावसार और रियल एस्टेट कारोबारी विश्वनाथ साहू के परिसरों पर भी छापा मारा
• ये सभी लोग भूमि और संपत्ति कारोबार से जुड़े हैं
• दीपक भावसार को एक पूर्व मंत्री का करीबी भी बताया जा रहा है
यहां हुई छापेमारी
• नीलबड़, एमपी नगर, कस्तूरबा नगर, होशंगाबाद रोड, 10 नंबर मार्केट
• मेंडोरी, मेंडोरा, आरपीएम टाउन आदि ठिकानों पर छापेमारी की गई
• इंदौर में राजेश शर्मा के फ्लैट व आदित्य गर्ग के यहां तलाशी ली गई

राजेश के 10 लॉकर्स के साथ मिले करोड़ों
सूत्रों के अनुसार सभी जगह मिलाकर तलाशी में 10 लॉकर और तीन करोड़ रुपये नकद मिले हैं। साथ ही ज्वेलरी भी मिली है जिसका मूल्यांकन अधिकारी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि आयकर विभाग के अफसरों को लंबे समय से इन पर नजर थी। विभाग ने 52 ठिकानों के लिए 52 टीमें बनाई थीं। यह टीमें 125 गाड़ियों में पहुंची थी। इनकम टैक्स के अधिकारियों की सुरक्षा के लिए पैरा मिलिट्री फोर्स के 500 जवानों को तैनात किया गया था।

कार्रवाई की जद में RTO का पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा

अब बात मध्य प्रदेश में RTO के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के खिलाफ कार्रवाई की । परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा का नाम पूरे मामले में जांच के दायरे में है। लोकायुक्त के बाद उसके ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई भी जारी है। सौरभ ने गुरुवार को अपने वकील राकेश पाराशर के जरिए अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी। इसी बीच ED ने सौरभ के घर और ठिकानों पर छापेमारी की है। ईडी की टीम सुबह भोपाल और ग्वालियर स्थित सौरभ के घर और दफ्तर पहुंची। हालांकि लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद से सौरभ शर्मा कहां है इसकी जानकारी किसी को नहीं है। जांच एजेंसियां भी सौरभ शर्मा की तलाश में अँधेरे में तीर चला रही हैं। आपको बता दें कि सौरभ शर्मा की अनुकंपा नियुक्ति मध्य प्रदेश के परिवहन विभाग में हुई थी। जिसके बाद वो करीब 7 साल तक परिवहन विभाग में सिपाही रहा।

कौन है सौरभ शर्मा ?

• सौरभ शर्मा की नियुक्ति परिवहन विभाग में साल 2016 में हुई
• 7 साल तक परिवहन विभाग में सिपाही रहा
• 2022 में वीआरएस लेकर बिल्डर व अन्य व्यवसाय किया
• लोकायुक्त ने 19 दिसंबर को सौरभ शर्मा के ठिकानों पर कार्रवाई की
• लोकायुक्त ने 2.95 करोड़ रुपए कैश व सोने चांदी के जेवरात बरामद किए
• दो क्विंटल चांदी की सिल्ली, 10 किलो चांदी के जेवरात मिले
• सोने-चांदी के जेवरात और कई प्रापर्टी के मिले थे दस्तावेज
• भोपाल के मेंडोरी में विनय असवानी बिल्डर के एक फॉर्म हाउस से मिली कार
• कार से मिले थे 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपए कैश
• कार्रवाई के दौरान ये कार चेतन सिंह की बताई गई
• जब्त सोना और कैश के तार सौरभ से जोड़े गए

उधर सौरभ के वकील राकेश पाराशर ने कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लोकायुक्त की कार्रवाई को गलत बताया है। एडवोकेट राकेश पाराशर के मुताबिक, सौरभ लोकसेवक नहीं है। इसके बाद भी लोकायुक्त ने उसके घर छापा मारा। यह कार्रवाई पूरी तरह से गलत है। जिस कार में सोना मिला, वो उसके नाम नहीं है। इस सोने से भी उसका कोई लेना-देना नहीं है, जबकि सौरभ के सहयोगी चेतन ने आयकर विभाग की पूछताछ में सोना और पैसा सौरभ का बताया था। सौरभ शर्मा की ओर से ग्वालियर के वकील राकेश पाराशर पैरवी कर रहे हैं। वकील पाराशर का कहना है, ‘मुझे नहीं पता सौरभ कहां है। याचिकाकर्ता की मां के कहने पर ग्वालियर से भोपाल आया हूं। हम जांच में पूरी तरह से सहयोग करने के लिए तैयार हैं। लोकायुक्त ने पूरी तरह से गलत कार्रवाई की है। क्या धाराएं लगाई हैं यह भी नहीं बताया जा रहा है। जब व्यक्ति शासकीय सेवक नहीं है तो छापे की कार्रवाई भी गलत है।

इस पूरे मामले में इतना ही नहीं मध्यप्रदेश के भोपाल में जो कार्रवाई हुई है। इसके तार छत्तीसगढ़ में महादेव सट्टा एप से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। दरअसल मामले को लेकर जारी कार्रवाई के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भोपाल की टीम ने गिरीश तलरेजा को गिरफ्तार किया था। यहां तलरेजा के ठिकानों पर कुछ माह पहले भी छापा मारा गया था। ईडी की एक टीम ने गिरीश तलरेजा को भोपाल स्थित उसके निवास से गिरफ्तार किया था। गिरीश तलरेजा महावेद सट्टा एप के मुख्य प्रमोटर्स में शामिल है। तलरेजा को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इंदौर की टीम ने गिरीश तलरेजा को समन जारी किया है। ईडी ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में महादेव सट्टा एप को लेकर जब कार्रवाई शुरू की और शुभम सोनी को गिरफ्तार किया तो यह खुलासा हुआ कि रायपुर निवासी शुभम सोनी और भोपाल निवासी प्रदीप तलरेजा के बीच करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ है। जांच में सामने आया कि प्रदीप तलरेजा भी महादेव सट्टा एप का प्रमोटर है। इसके बाद उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया और ईडी ने जांच शुरू की। इंटेलीजेंस की सूचना के बाद भोपाल स्थित ईडी कार्यालय की टीम ने गिरीश को गिरफ्तार कर लिया।

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