Student Health Helpline, भोपाल: उच्च शिक्षा विभाग द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और राष्ट्रीय टास्क फोर्स के अनुक्रम में शुक्रवार को उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की आत्महत्या की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर एक अहम सेमिनार का आयोजन किया गया। यह सेमिनार बल्लभ भवन-3, भोपाल में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
Student Health Helpline: विभिन्न विभागों और शिक्षण संस्थानों की रही भागीदारी
सेमिनार में भोपाल जिले के शासकीय और निजी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के कुलसचिव, प्राचार्य शामिल हुए। साथ ही स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा, महिला-बाल विकास, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण, नगरीय प्रशासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य विभाग, पुलिस, जनसंपर्क विभाग, मप्र निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान, सीहोर सहित विभिन्न हितधारक विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनिवार्य पालन
अपर मुख्य सचिव श्री अनुपम राजन ने कहा कि सभी शैक्षणिक संस्थान माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करें। उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या की रोकथाम के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों की जानकारी देते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।
मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन नंबर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित हों
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी शैक्षणिक संस्थानों में टेली मानस 14416, उमंग हेल्पलाइन 14425 और आपातकालीन नंबर 112 को परिसर की दीवारों पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को समय पर सहायता मिल सके। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य को लेकर नियमित जागरूकता गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए।
Student Health Helpline: आत्महत्या या अप्राकृतिक मृत्यु की सूचना तुरंत पुलिस को देना अनिवार्य
श्री राजन ने कहा कि किसी भी छात्र की आत्महत्या अथवा अप्राकृतिक मृत्यु की स्थिति में संबंधित शैक्षणिक संस्थान द्वारा तत्काल पुलिस को सूचना देना अनिवार्य होगा, चाहे घटना परिसर के भीतर हुई हो या बाहर। ऐसी घटनाओं की वार्षिक रिपोर्ट विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और संबंधित नियामक संस्थाओं को भेजना भी आवश्यक होगा।

आवासीय संस्थानों में 24×7 चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश
अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि आवासीय शैक्षणिक संस्थानों में चौबीसों घंटे आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए या निकटतम एक किलोमीटर की परिधि में ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित हो। लंबे समय से रिक्त शिक्षण एवं गैर-शिक्षण पदों को चार माह में भरने और आरक्षित वर्गों के पदों को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए।
छात्रवृत्तियों में देरी नहीं होगी स्वीकार
उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी लंबित छात्रवृत्तियों का समयबद्ध निराकरण किया जाए। छात्रवृत्ति में विलंब के कारण किसी भी छात्र को परीक्षा, कक्षा, हॉस्टल या डिग्री/मार्कशीट से वंचित नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही रैगिंग निरोधक व्यवस्था, समान अवसर प्रकोष्ठ, आंतरिक शिकायत समिति और छात्र शिकायत निवारण तंत्र के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए।
हर संस्थान में काउंसलर और विशेष सेल का गठन
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सभी शैक्षणिक संस्थानों में काउंसलर की नियुक्ति की जाए और मानसिक स्वास्थ्य से पीड़ित विद्यार्थियों की समय पर पहचान के लिए विशेष सेल गठित किया जाए। जिला और संभाग स्तर पर विद्यार्थियों, फैकल्टी सदस्यों और अभिभावकों के लिए नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया गया।
कोचिंग संस्थानों का अनिवार्य पंजीयन
उन्होंने कहा कि बिना पंजीयन के कोई भी कोचिंग संस्था संचालित न हो, यह सुनिश्चित किया जाए। प्रत्येक जिले में निगरानी के लिए जिला स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया गया है।
Student Health Helpline: विशेषज्ञों ने बताए मानसिक तनाव के लक्षण और समाधान
सेमिनार में आयोजित विशेष सत्र में विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य से ग्रसित बच्चों में लक्षणों की पहचान और बचाव के उपायों पर जानकारी दी।
एमएलबी कन्या महाविद्यालय भोपाल की प्रोफेसर डॉ. अनिता पुरी ने कहा कि छात्रों में मानसिक तनाव के शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है और शिक्षक ही छात्र का पहला काउंसलर होता है।
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. सुमित राय ने बच्चों में समस्या से निपटने और समाधान खोजने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया।
डॉ. काकोली राय ने हाई-रिस्क इंडिकेटर्स को समझने और बच्चों की दिनचर्या पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
शासकीय एमएलबी कॉलेज इंदौर के साइकोलॉजिस्ट डॉ. अमित सोनी ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की पहचान और रोकथाम के उपाय साझा किए।
वहीं संस्था ‘योरदोस्त’ की सीईओ सुश्री रिचा सिंह ने विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और खुशहाल भारत की दिशा में सामूहिक प्रयासों की जरूरत बताई।

आत्महत्या रोकथाम के प्रयासों पर संस्थानों ने दिए सुझाव
सेमिनार के दौरान शासकीय और निजी महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों और प्राचार्यों ने विद्यार्थियों की आत्महत्या की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों को लेकर अपने-अपने सुझाव भी रखे।
Student Health Helpline: स्टेट टास्क फोर्स का गठन, बहु-विभागीय समन्वय
उल्लेखनीय है कि नेशनल टास्क फोर्स के निर्देशों के बाद उच्च शिक्षा विभाग द्वारा स्टेट टास्क फोर्स का गठन किया गया है। आयुक्त उच्च शिक्षा श्री प्रबल सिपाहा को मप्र के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। आयुक्त उच्च शिक्षा की अध्यक्षता में गठित इस एसटीएफ में स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, बाल संरक्षण, सामाजिक न्याय और नगरीय प्रशासन विभागों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
यह बहु-विभागीय तंत्र विद्यार्थियों की मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों पर व्यापक दृष्टिकोण से काम करेगा।
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