संवाददाता: राजेश पंवार
इंदौर की त्रासदी के बाद भी नहीं चेता स्थानीय प्रशासन
Maheshwar इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया, लेकिन मंडलेश्वर में इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। महेश्वर विधायक राजकुमार मेव की कड़ी नाराजगी और एसडीएम पूर्वा मण्डलोई द्वारा मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किए जाने के बावजूद नगर परिषद की कार्यप्रणाली जस की तस बनी हुई है। पाइपलाइन की सफाई और जलापूर्ति की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। कई वार्डों में आज भी लोग बदबूदार और गंदा पानी पीने को मजबूर हैं।

वार्ड क्रमांक ८ में गंदे पानी से फैली बीमारी
Maheshwar नगर के वार्ड क्रमांक ८, पटलारा मोहल्ला, में बीते आठ दिनों से नलों से आ रहा दूषित पानी लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। सोमवार को स्थिति तब और गंभीर हो गई जब आधा दर्जन से अधिक लोग एक साथ बीमार पड़ गए। स्थानीय रहवासियों के अनुसार पानी से तेज बदबू आ रही है, जिसे पीना तो दूर सूंघना भी मुश्किल है। इसके सेवन से बच्चों और बुजुर्गों में पेट दर्द, उल्टी-दस्त और मुंह में छाले जैसी शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। मोहल्ले के लगभग हर दूसरे घर में कोई न कोई व्यक्ति बीमारी से जूझ रहा है।

लापरवाही का आरोप, इलाज से पहले लीकेज की तलाश
Maheshwar बीमारियों की सूचना पर नायब तहसीलदार संजय बावेल और नगर परिषद के अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन लोगों का आरोप है कि तत्काल उपचार की व्यवस्था करने के बजाय अधिकारी केवल पाइपलाइन में लीकेज तलाशने में लगे रहे। वार्ड के पार्षद नितिन पाटीदार का कहना है कि पाइपलाइन के वाल्व चैंबर गंदगी से भरे पड़े हैं और साफ-सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। गंभीर आरोप यह भी है कि जांच के नाम पर साफ इलाकों से पानी के सैंपल लिए गए, जबकि प्रभावित वार्ड से सैंपल तक नहीं लिया गया।
वहीं प्रशासन का दावा है कि शिकायत सही पाई गई है और समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि लोगों को अब भी साफ पानी और राहत का इंतजार है।
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