‘द संभल फाइल’ !

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‘The Sambhal File’!

क्या यूपी के दंगा पीड़ितों को इंसाफ मिलेगा, सभी ‘दंगों की फाइल’ खुलेंगी ?

उत्तरप्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट मामले की सुनवाई अब 8 जनवरी 2025 को होगी। इस मामले में आगे क्या होगा ये भविष्य के गर्भ में है लेकिन ताजा मामला कार्तिकेय महादेव मंदिर के मिलने के बाद से गरमा गया है। संभलेश्वर महादेव मंदिर के 46 साल बाद पट खोले गए। ताजा विवाद के बीच अब इस पर कई सवाल उठने लगे हैं। मसलन 46 साल तक इस मंदिर का ताला बंद क्यों रहा? तब ऐसा क्या हुआ था, जिसके कारण मंदिर में ताला लगाकर लोगों को यहां से जाना पड़ा? ये सभी सवाल जोरदार तरीके से उठाए जा रहे हैं। इतिहास के पन्नों से उस समय की घटना को तलाशने की कोशिश की जा रही है।

सीएम योगी के बयान से एक्शन में आया प्रशासन

इस मामले में प्रशासन तक हरकत में आया जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि संभल में 209 हिंदुओं का नरसंहार हुआ था। संभल में 1947 के बाद से अब तक 209 हिंदुओं की हत्या दंगों में हुई है। उन्होंने कहा संभल में हुए हिंदुओं के नरसंहार पर सभी ने चुप्पी साधे रखी। 29 मार्च 1978 के दंगे में आगजनी की घटनाएं हुई थी। इस बयान के बाद मुरादाबाद प्रशासन ने 46 साल पहले हुए दंगों की फाइल से धूल हटाना शुरू कर दिया है।

प्रशासन ने 46 साल पहले हुए दंगों की फाइल खंगालना शुरु किया

संभल में जामा मस्जिद मामले की न्यायिक प्रक्रिया के बीच प्रशासन ने संभल में 46 साल पहले यानि 1978 में हुए दंगों की फाइलों पर जमी धूल हटाना शुरू कर दिया है। मुरादाबाद कमिश्नर ने अफसरों से 1978 में हुए संभल दंगों के रिकॉर्ड तलब किए हैं। हालांकि कमिश्नर का कहना है कि ये एक रूटीन प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि मंडल के सभी पुराने मुकदमों की मॉनिटरिंग की जा रही है। इस कार्रवाई को मुख्यमंत्री योगी के बयान से जोड़कर देखा जा रहा है। अधिकारी ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि करीब 200 लोगों की हत्या दंगे में होने के बाद भी किसी को भी सजा क्यों नहीं मिली थी। चूक कहां हुई और किस स्तर पर हुई थी। पुलिस सूत्रों का ये भी कहना है कि 46 साल पहले संभल दंगों के मामले में कुल 169 एफआईआर दर्ज की गई थी। खुद पुलिस ने भी 3 एफआईआर दर्ज की थी। फिर दंगों के आरोपियों को सलाखों को पीछे क्यों नहीं पहुंचा पाई पुलिस।

संभल में बहुंसख्यक से अल्पसंख्यक क्यों हुए हिंदू ?

29 मार्च सन् 1978 में संभल में दो पक्षों में दंगे हुए थे जिसमें करीब 200 हिंदुओं की मौत हो गई थी। हालांकि सरकारी रिकॉर्ड में ये संख्या 184 के करीब बताई गई। इन दंगों में शहर जल उठा था। हालात को संभालने के लिए प्रशासन ने कर्फ्यू लगाया था। जो दो महीने तक चला था। दंगों के बाद संभल के दीपा सराय इलाके से कई हिंदू परिवार अपना घर वार जमीन जायजाद बेच कर पलायन कर गए थे, तो कई परिवार अपना सब कुछ छोड़कर चले गए थे। जिसमें 40 रस्तोगी परिवार भी शामिल थे। जो अपना घर वार सब कुछ छोड़कर दूसरे शहरों में पलायन कर गए थे। इतना ही नहीं इस क्षेत्र के मंदिर में कोई पूजा करने वाला तक नहीं बचा था। इसके बाद संभल की आबादी का अनुपात पूरी तरह से गड़बड़ा गया था। आजादी के समय यहां आधे से अधिक हिंदू आबादी थी, जो अब संभल शहर में बमुश्किल 15 फीसदी रह गई है। इस लिहाज से हिंदू यहां अल्पसंख्यक हो गए हैं। अब स्थानीय प्रशासन और लोगों की सक्रियता से संभलेश्वर महादेव मंदिर के 46 साल बाद पट खोले गए हैं। इसको लेकर अब कई सवाल उठने लगे हैं। ये मुद्दा राज्य विधानसभा में भी गूंजा उसके बाद सीएम योगी ने यूपी में दंगों के इतिहास की जानकारी दी।

यूपी में आजादी के बाद दंगों का इतिहास

  • 1970- प्रयागराज के दंगों में 9 लोग मारे गए थे।
  • 1974- मेरठ की हिंसा में 8 लोगों की मौत हुई थी।
  • 1976- मुरादाबाद में हुए दंगों में 3 लोगों की मौत हुई थी।
  • 1976- बहराइच के दंगों में 3 लोगों की मौत हुई थी।
  • 1977- वाराणसी में हुई हिंसा में और 8 लोगों की मौत हुई थी।
  • 1978- मुरादाबाद में हुए दंगों में 19 लोगों की मौत हुई थी।
  • 1978- अलीगढ़ में हुई हिंसा में 21 लोगों की मौत हुई थी।
  • 2000- आजमगढ़ के मुबारकपुर के दंगों में 4 की मौत हुई थी।

संभल में कब-कब हुई सांप्रदायिक हिंसा ?

  • 1947- दंगों में 1 की मौत हुई थी।
  • 1948- दंगों में 6 लोगों की मौत हुई थी।
  • 1976- दंगों में 5 की जान गई थी।
  • 1978- दंगों में 184 हिंदुओं की मौत हुई थी।
  • 1980-1982- के दंगों में दो की मौत हुई थी।
  • 1986- हिंसा में 4 की मौत हुई थी।
  • 1992- सांप्रदायिक हिंसा में 5 की मौत हुई थी।
  • 1996- दंगों में दो की मौत हुई थी।

 कुल मिलाकर संभलेश्वर महादेव मंदिर के पट खुलने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। सीएम योगी ने सूबे की पुरानी सरकारों के दौरान हुए दंगों का इतिहास गिनाकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं। इस निशाने से समाजवादी बैकफुट पर आ गई है, सपा सांसद रामगोपाल ने कहा कि उस दौरान संभल में जिसकी जमीन थी, वो लोग खुद ही मंदिर बंद करके चले गए थे। उन्होंने सीएम योगी पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर कोई गेरुआ कपड़े पहनकर झूठ बोलता है, तो उसका इलाज नहीं है। उधर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि कोई भी सच को दबा नहीं सकता है। सच, सच होता है, लेकिन हमें भविष्य की बात करनी चाहिए। क्या मौजूदा समय में गंगा साफ़ है? कुम्भ व्यापार की जगह नहीं होनी चाहिए। आज कुम्भ में भी हमारे साधु संतों को सम्मान नहीं मिल रहा है। बहरहाल इस मुद्दे की आगे जैसे-जैसे परतें खुलेंगी वैसे-वैसे देश के सबसे बड़े सूबे का राजनीतिक माहौल गरमाने के पूरे आसार हैं।

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