स्वामी चक्रपाणि ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, महापुरुष काली प्रसाद को श्रद्धांजलि अर्पित की, संसद में प्रतिमा स्थापना की मांग

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Swami Chakrapani pays tribute to former President Dr. Rajendra Prasad and great man Kali Prasad, demands installation of statues in Parliament

भारतीय नोटों पर चित्र और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में जीवनगाथा शामिल करने की माँग

आज भारत के प्रथम राष्ट्रपति एवं भारत रत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी तथा प्रयाग के के.पी. ट्रस्ट के महापुरुष, शिक्षा–तपस्वी श्री काली प्रसाद जी की जयंती के शुभ अवसर पर परम पूज्य सनातन सम्राट स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने दोनों महापुरुषों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि—“डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी का राष्ट्रीय नेतृत्व और काली प्रसाद जी का संपूर्ण जीवन शिक्षा तथा समाज को समर्पित रहा। आज नए भारत को इन महापुरुषों के त्याग, ज्ञान, सेवा और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।” अखिल भारत हिंदू महासभा, संत महासभा एवं श्री चित्रगुप्त अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि जी महाराज की प्रमुख माँगें

  1. संसद भवन में भव्य प्रतिमा स्थापना

“लोकतंत्र के मंदिर, भारतीय संसद में दोनों महापुरुषों की प्रतिमा स्थापित की जाए, ताकि राष्ट्र हमेशा उनके आदर्शों और त्याग को नमन कर सके।”

  1. भारतीय मुद्रा पर चित्र

“भारतीय नोटों पर गांधी जी के साथ-साथ या उनके स्थान पर
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी और काली प्रसाद जी के चित्र लगाए जाएँ।
यह उनके राष्ट्रनिर्माण और समाज-शिक्षा के अमूल्य योगदान का सम्मान होगा।”

  1. राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में जीवनचरित्र शामिल हो

“दोनों महापुरुषों की जीवनगाथा विद्यालयों के पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल की जाए, ताकि आने वाली पीढ़ी त्याग, सेवा, ज्ञान और चरित्र के बारे में सही शिक्षा प्राप्त करे।”

उन्होंने आगे कहा—“हमारा देश केवल चित्रों की नहीं, चरित्र की पूजा करता आया है।
और डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी ‘बाबूजी’ तथा काली प्रसाद जी दोनों ही ज्ञान, त्याग, बलिदान, स्वच्छ चरित्र और राष्ट्रसेवा के जीवंत प्रतिमूर्ति थे।
इसलिए वोट की राजनीति या किसी भी कारण से इनके योगदान को भुलाया न जाए।”

स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने अंत में कहा कि “महापुरुषों का सम्मान राष्ट्रीय कर्तव्य है, और यह सम्मान तभी पूर्ण होगा जब उनकी प्रतिमा संसद में स्थापित हो, उनके चित्र भारतीय मुद्रा पर अंकित किए जाएँ और उनकी जीवनगाथा शिक्षा प्रणाली का भाग बने।”

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