by: vijay nandan
दिल्ली: संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होते ही राजनीतिक टकराव सामने आ गया। SIR मुद्दे को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके चलते लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही स्थगित करनी पड़ी। उधर राज्यसभा की कार्यवाही नए सभापति का स्वागत करते हुए प्रारंभ हुई। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन से आग्रह किया कि चर्चा रचनात्मक हो और जनता की प्राथमिक चिंताओं पर ध्यान केंद्रित रखा जाए। इस सत्र में सरकार 14 महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने पर जोर दे रही है। इनमें दिवाला, बीमा, सिक्योरिटीज बाज़ार, कॉर्पोरेट कानून, राष्ट्रीय राजमार्ग, उच्च शिक्षा आयोग, परमाणु ऊर्जा, जीएसटी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं।

सत्र के पहले ही दिन SIR विवाद ने माहौल को गरमा दिया। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई है, जिससे आने वाले दिनों में तनाव और बहस के तेज होने की संभावना है। SIR पर हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। विपक्षी दलों ने SIR के विरोध में प्रदर्शन किया, जिसके कारण लोकसभा स्पीकर को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

सत्र अहंकार में नहीं बदलना चाहिए: प्रधानमंत्री का संदेश
उधर पीएम मोदी ने संसद के शीतकालीन सत्र पर अपने संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन के जीवन अनुभवों का ज़िक्र करते हुए कहा कि काशी यात्रा के बाद उन्होंने नॉन-वेग भोजन पूरी तरह त्यागने का निर्णय लिया। पीएम ने इसे समाज सेवा के प्रति समर्पण और सकारात्मक सोच का प्रतीक बताया। सदन में स्वागत भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि राधाकृष्णन का नेतृत्व लोकतंत्र की शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्यों में राज्यपाल रहते हुए राधाकृष्णन ने गांव-गांव जाकर जनता से जुड़ाव बनाए रखा और प्रशासनिक पद को जनता की सेवा का माध्यम बनाया। PM मोदी ने कहा कि राजनीति में नकारात्मकता काम आ सकती है, लेकिन उसे मर्यादित रखना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से जिम्मेदारी निभाने और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। सत्र से पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि देश आर्थिक प्रगति की नई रफ्तार पकड़ रहा है, इसलिए संसद को रचनात्मक विधायी कार्यों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से हार की निराशा छोड़ सकारात्मक भूमिका निभाने को कहा।

PM मोदी ने कहा कि लोकतंत्र में विजय और पराजय दोनों को शालीनता से स्वीकार करना जरूरी है। उन्होंने बिहार चुनाव के बाद दिए गए बयानों को लेकर विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि बौखलाहट को संसद का मैदान न बनाया जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि शीतकालीन सत्र केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि विकास की ऊर्जा बढ़ाने का अवसर है। उन्होंने हालिया चुनावों में महिलाओं और जनता की बढ़ती भागीदारी को लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण बताया।





