by: vijay nandan
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के गौरगंज क्षेत्र में 6 वर्ष की मासूम के साथ दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार सलमान के खिलाफ स्थानीय लोगों का आक्रोश चरम पर है। सामाजिक संगठनों का एक वर्ग आरोपी को नपुंसक बनाने (Castration) की सज़ा देने की मांग कर रहा है, वहीं कई स्थानीय लोग उसके लिए सीधे मौत की सज़ा (Capital Punishment) की मांग कर रहे हैं। यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि यौन अपराधों को रोकने के लिए कौन-सा दंड सबसे प्रभावी है? भारत में दुष्कर्म के दोषियों को नपुंसक बनाने का कोई कानून नहीं है। लगातार बढ़ती यौन अपराधों की घटनाओं के बीच यह बहस तेज हो रही है कि क्या देश में भी ऐसा कानून लागू किया जाना चाहिए? साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि जिन देशों में नपुंसकता का प्रावधान है, वहां क्या इस कानून से बलात्कार के मामलों में कमी आई है और उस समाज में इस सज़ा को किस दृष्टि से देखा जाता है? इन सभी पहलुओं का संतुलित अध्ययन ही यह तय कर सकता है कि भारत में नपुंसकता को दंड के रूप में लागू किया जाना चाहिए या नहीं।

बलात्कारियों और बाल यौन शोषण के दोषियों को ‘नपुंसक बनाने’ की सज़ा इन इन देशों में लागू
यौन अपराधों को रोकने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की लड़ाई में कई देश कठोर दंड का सहारा लेते हैं। इन्हीं में से एक है रासायनिक या शारीरिक नपुंसकता है, यह ऐसा उपाय है, जिसमें अपराधी की यौन इच्छा या क्षमता को कम करने/निष्क्रिय करने का प्रयास किया जाता है। दुनिया भर में इसके उपयोग को लेकर विवाद है, लेकिन कुछ न्याय प्रणालियाँ इसे प्रभावी दंड के रूप में अपनाती हैं।

- रासायनिक नपुंसकता क्या है?
रासायनिक नपुंसकता दवाओं के जरिए टेस्टोस्टेरोन और यौन इच्छा को कम करती है।
आम तौर पर डिपो-प्रोवेरा (medroxyprogesterone acetate) या अन्य हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं।
यह प्रक्रिया अस्थायी होती है—दवा बंद होते ही प्रभाव धीरे-धीरे कम हो सकता है।
कई देशों में इसे कैद के साथ या पैरोल के शर्त के रूप में लागू किया जाता है।
- शारीरिक (Surgical) नपुंसकता
यह स्थायी प्रक्रिया है—टेस्टिकल्स को हटाया जाता है या नसों को काट दिया जाता है।
इसे मानवाधिकार संगठनों द्वारा “क्रूर और अमानवीय दंड” कहा गया है।
वर्तमान समय में बहुत कम देशों में यह कानूनी रूप से उपयोग होता है या इसे स्वैच्छिक विकल्प के रूप में रखा गया है।
इन देशों में नपुंसकता की सज़ा लागू होती है..
- पोलैंड
2010 में पोलैंड ने बाल यौन अपराधियों के लिए रासायनिक नपुंसकता का कानून पास किया।
12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ दुष्कर्म करने वालों पर यह अनिवार्य रूप से लागू होती है।
अपराधी को जेल से छूटने के बाद भी नियमित दवा इंजेक्शन दिए जाते हैं। - रूस
रूस में अदालत बाल यौन अपराध के मामलों में रासायनिक नपुंसकता का आदेश दे सकती है।
विशेषज्ञ समिति द्वारा अपराधी की मानसिक स्थिति, यौन विकृति और खतरे का आकलन किया जाता है।
दवा का कोर्स सरकार की मेडिकल इकाइयों द्वारा करवाया जाता है। - दक्षिण कोरिया
2011 में दक्षिण कोरिया ने बाल यौन शोषण के दोषियों के लिए रासायनिक नपुंसकता वैधानिक बनाई।
दंड 3–5 वर्ष तक रह सकता है और कई मामलों में जेल की सज़ा के साथ लागू होता है।
यह कानून 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से जुड़े अपराधों पर केंद्रित है। - संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)
कई राज्यों में यह विकल्प के रूप में मौजूद है।
कैलिफ़ोर्निया, फ्लोरिडा, टेक्सास, लूज़ियाना, ओरेगन, अलबामा आदि राज्यों में बाल यौन अपराधियों को रासायनिक नपुंसकता की शर्त पर पैरोल मिलती है।
पहली बार अपराध पर अदालत अनुमति दे सकती है, जबकि दूसरी बार अपराध पर दंड अक्सर अनिवार्य होता है। - इंडोनेशिया
2016 के बाद इंडोनेशिया ने बाल यौन अपराधियों पर रासायनिक नपुंसकता की अनुमति दी।
राष्ट्रपति के आदेश में “कठोर दंड” के रूप में इसे जोड़ा गया, और 2019 में अदालत ने पहली बार इसे लागू भी किया।
कुछ मामलों में इलेक्ट्रॉनिक निगरानी (GPS ankle bracelets) के साथ उपयोग किया जाता है। - चेक गणराज्य
चेक गणराज्य में स्वैच्छिक आधार पर शारीरिक नपुंसकता की अनुमति है।
केवल तब जब अपराधी खुद सहमत हो और विशेषज्ञ इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि इससे पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है।
यूरोप की परिषद और मानवाधिकार समूह इस प्रथा का कड़ा विरोध करते हैं।
बाल यौन शोषण और बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों से निपटने के लिए कई देशों ने नपुंसकता को दंड के रूप में अपनाया है। लेकिन यह वैश्विक रूप से विवादित और संवेदनशील है। जहां समर्थक इसे पीड़ितों की सुरक्षा का प्रभावी माध्यम बताते हैं, वहीं विरोधी इसे मानवाधिकार उल्लंघन और क्रूर दंड कहते हैं। समाज, विधि और मेडिकल विज्ञान तीनों की सहमति ही इस बहस का संतुलित समाधान तय करेगी।





