रिपोर्ट: चन्द्रकान्त पारगीर
कोरिया: जेसीसीजे प्रमुख अमित जोगी ने एक बार फिर चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में उनकी पार्टी किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी। उन्होंने सभी 42 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से अपील की कि वे भी चुनावी प्रक्रिया से दूर रहें जब तक प्रणाली में भरोसा वापस नहीं आता।
जोगी ने मुख्य रूप से दो मांगें रखीं
इलेक्टोरल बॉन्ड को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
चुनाव आयुक्त चयन प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश को पुनः शामिल किया जाए।

नक्सलवाद पर बयान: “मनोबल तोड़ने वाली सहानुभूति”
नक्सलवाद के मुद्दे पर जोगी ने कहा कि संविधान में विश्वास न रखने वालों के प्रति सहानुभूति जताना दुखद और खतरनाक है। उन्होंने पूछा कि ज़ीरम, एर्राबोर, दरबेघाट और जिंका जैसी बड़ी नक्सली घटनाओं के समय “सरेंडर” की बात क्यों नहीं उठाई गई। जोगी के अनुसार “ऐसे वक्तव्य हमारे जवानों का मनोबल कमजोर करते हैं। अब लड़ाई को उसके अंतिम परिणाम तक ले जाना जरूरी है।”
अमित जोगी का कहना है कि छत्तीसगढ़ में सरकार के निर्णय, चुनाव व्यवस्था और नक्सल नीति—तीनों क्षेत्र ऐसे हैं जहां पारदर्शिता की कमी है और इसे संवैधानिक मूल्यों से ही सुधारा जा सकता है।





